नयी दिल्ली। स्थानीय शेयर बाजारों की दिशा इस सप्ताह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों से तय होगी। विशेषज्ञों ने यह अनुमान जताते हुए कहा कि वैश्विक बाजारों के रुझान, विदेशी निवेशकों के रुख और रुपये-डॉलर की चाल भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेगी। राम नवमी के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार को शेयर बाजार बंद रहेंगे।
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (एसवीपी) अजित मिश्रा ने कहा,मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इस सप्ताह बाजार आंकड़ों के प्रति संवेदनशील रह सकता है। पश्चिम एशिया संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख बाहरी कारक बने रहेंगे और निकट अवधि में बाजार रुझान को तय करेंगे। उन्होंने आगे कहा,घरेलू मोर्चे पर निवेशक विनिर्माण, सेवाओं और कंपोजिट श्रेणियों के लिए एचएसबीसी के पीएमआई के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे, जो व्यावसायिक गतिविधियों के रुझानों का शुरूआती संकेत देगा।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कमजोर होते रुपये और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भारत की वृद्धि और कॉरपोरेट आय पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंताओं के कारण, विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय शेयरों से 88,180 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। आॅनलाइन कारोबारी फर्म एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा, बाजारों के अत्यधिक अस्थिर और घटना आधारित रहने का अनुमान है। निकट अवधि की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास उभरती स्थिति पर निर्भर करेगी।
किसी भी लंबे व्यवधान के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के स्तर से ऊपर बनी रह सकती हैं। इससे मुद्रास्फीति और चालू खाते का घाटा का दबाव बढ़ सकता है और जोखिम से बचने की धारणा बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि एफआईआई प्रवाह, रुपये की चाल और अमेरिकी डॉलर की मजबूती सहित वैश्विक संकेतों पर नजर रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों में कमी या तनाव कम होने के किसी भी संकेत से तेजी आ सकती है, जबकि तनाव बढ़ने से बाजार पर और दबाव पड़ सकता है। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स में 30.96 अंक (0.04 प्रतिशत) और एनएसई निफ्टी में 36.6 अंक (0.15 प्रतिशत) की गिरावट दर्ज की गई थी।





