back to top

हिन्दी भाषा में विस्तार की सम्भावनाएं है : डा. रमेश प्रताप सिंह

हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा हिन्दी दिवस समारोह के शुभ अवसर पर शनिवार को एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हिन्दी भवन के निराला सभागार में किया गया। दीप प्रज्वलन, मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण, पुष्पार्पण के उपरान्त वाणी वंदना सर्वजीत सिंह द्वारा प्रस्तुत की गयी। सम्माननीय अतिथि डॉ. रामकठिन सिंह, डॉ. श्रुति, डॉ. रमेश प्रताप सिंह का स्वागत स्मृति चिह्न भेंट कर आरपी सिंह, निदेशक, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा किया गया।
डॉ. रमेश प्रताप सिंह ने कहा हिन्दी भाषा में विस्तार की सम्भावनाएं है। हिन्दी सभी भाषाओं की समुच्य है। भाषा अभिव्यक्ति का साधन होती है। आज की हिन्दी राजभाषा तक सीमित नही है। इसका हिन्दी भाषा से सरल कोई भाषा नही है। हिन्इदी पहले भी समृद्ध थी और आज की हिन्दी में विरासत के तत्व विद्यमान हैं।
हिन्दी राष्ट्रभाषा नही बन सकी उसमें हिन्दी ही नही बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी है, हिन्दी हमारी भावना, संवेदना और संस्कृति है। क्षेत्रीय, प्रान्तीय भाषा कन्नड़, नेपाली हिन्दी को विकसित होने में बाधा डालती है। केशवचन्द्र शेन से हिन्दी को राष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान बनाने में बड़ी भूमिका निभायी थी। हिन्दी भाषा कभी-कभी कमजोर स्थिति में नही रही। देश स्वतंत्रता में हिन्दी साहित्यकारों का काफी योगदान रहा। साहित्यकारों की कालजयी ताकत भी रही जिससे देश स्वतंत्र हो गया।
डॉ. श्रुति ने कहा आज हिन्दी भाषा के सम्मुख कई चुनौतियाँ है। हिन्दी में बोलने की अभूतपूर्व क्षमता है। भारत बहुभाषी-विविध संस्कृतियों का देश है। भाषायी संस्कृति को एक सूत्र में बांधने की क्षमता हिन्दी को ही है। हिन्दी केवल एक भाषा ही नही भारत की संस्कृति हैं हिन्दी भारत माता के माथे की बिन्दी है। महात्मा गांधी जी ने एकभाषिता पर काफी बल दिया। हिन्दी में अन्य भाषाओं को समाहित करने की क्षमता है। हिन्दी का शब्द भण्डार निरन्तर बढ़ता जा रहा है। हिन्दी में संप्रेषणीयता की अद्भुत क्षमता है। संचार माध्यम व फिल्मों ने भी हिन्दी को बढ़ावा दिया। अलग-अलग भाषाओं के शब्द को हिन्दी ने अपने में समाहित करती चली जा रही है। हिन्दी को आगे बढ़ाने में आत्मविश्वास की आवश्यकता है। हमारी हिन्दी की भावना देशवासियों में प्रचार-प्रसार करने की आज आवश्यकता है।
डॉ. रामकठिन सिंह ने कहा हिन्दी को बढ़ावा देने में विज्ञान परिषद ने 1914 से निरन्तर प्रकाशित होने वाली पत्रिका विज्ञान ने अहम भूमिका निभायी। अहिन्दी लेखकों में गुणाकरमुले का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वर्तमान में नई शिक्षा नीति ने भी हिन्दी को अग्रसर करने में प्रयासरत है। हमे अपनी मात्र भाषा में लिखने, बोलने, पढ़ने, सीखने में गर्व का अनुुभव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अनुवाद के स्थान पर मूल लेखन पर बल देना चाहिए। हिन्दी एक सक्षम भाषा है, जिसमें विज्ञान लेखन की पर्याप्त क्षमता है। उन्होेंने विज्ञान विषय पर केन्द्रित अपनी कविता का पाठ किया।
डॉ. अमिता दुबे, प्रधान सम्पादक, उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा कार्यक्रम का संचालन एवं संगोष्ठी में उपस्थित समस्त साहित्यकारों, विद्वत्तजनों एवं मीडिया कर्मियों का आभार व्यक्त किया गया।

RELATED ARTICLES

लखनऊ के गांवों में आज भी जीवित है होली में फाग की परम्परा

लखनऊ। सदा आनंद रहै यह नगरी,मोहन ख्यालै होरी हो,दूध दही की कमी ना होय,अन्नन की अधिकाई हो। सदा अनंद रहे यह नगरी मोहन ख्यालै...

फाल्गुन एकादशी पूर्व निकाली गई श्री खाटू श्याम ध्वजा यात्रा

2100 श्री श्याम भक्तों लेकर चले श्याम ध्वजा लखनऊ। श्री श्याम मंदिर परिवार के सदस्यों की तरफ से फाल्गुन द्वादशी से पूर्व निशान यात्रा निकाली...

अशोक का आत्मबोध बना विजय-पर्व की आत्मा

-संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति ने बांधा समांलखनऊ। संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह, गोमती नगर में उस समय इतिहास जीवंत...

लखनऊ के गांवों में आज भी जीवित है होली में फाग की परम्परा

लखनऊ। सदा आनंद रहै यह नगरी,मोहन ख्यालै होरी हो,दूध दही की कमी ना होय,अन्नन की अधिकाई हो। सदा अनंद रहे यह नगरी मोहन ख्यालै...

फाल्गुन एकादशी पूर्व निकाली गई श्री खाटू श्याम ध्वजा यात्रा

2100 श्री श्याम भक्तों लेकर चले श्याम ध्वजा लखनऊ। श्री श्याम मंदिर परिवार के सदस्यों की तरफ से फाल्गुन द्वादशी से पूर्व निशान यात्रा निकाली...

अशोक का आत्मबोध बना विजय-पर्व की आत्मा

-संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति ने बांधा समांलखनऊ। संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह, गोमती नगर में उस समय इतिहास जीवंत...

ध्रुपद की पारम्परिक शैली, ताल-व्यवस्था तथा अभ्यास पद्धति को समझा

ध्रुपद कार्यशाला का द्वितीय दिवस प्रेरणादायक वातावरण में सम्पन्नलखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित ध्रुपद कार्यशाला का द्वितीय दिवस अत्यंत प्रेरणादायक एवं शिक्षाप्रद...

हिंदी संस्थान के बाल साहित्य सम्मान से नवाजे जाएंगे रेनू मंडल समेत पांच साहित्यकार

इस बैठक में वर्ष 2024 के बाल साहित्य सम्मानों पर समिति ने निर्णय लिये गएलखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की बाल साहित्य संबर्द्धन योजना...

दर्द का ऐतिहासिक दस्तावेज होगी अमृता प्रीतम पर आधारित ‘आजाद रूह’

28 की शामत गाडगे प्रेक्षागृह में होगा मंचन लखनऊ। कल्चरल क्वेस्ट अपनी अनेक विषय परक सफल नृत्य नाटिकाओं की कड़ी में अमृता प्रीतम के जीवन...