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मर-मिटने वाली मोहब्बत की दास्तान सुनाती ‘तेरे इश्क में’

इस बार भी वही जुनून बड़े परदे पर साफ झलकता है
लखनऊ। बॉलीवुड में इस समय प्रेम कहानियों की मानो बहार आ गई है। सैयारा की सुपर सफलता के बाद धड़क 2, परम सुंदरी, सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी और एक दीवाने की दीवानियत जैसी लव स्टोरीज की लाइन लग गई है। इतना ही नहीं, इस हफ़्ते भी सिनेमाघरों में प्यार का डोज दो नई फिल्मों के साथ मिलेगा—गुस्ताख इश्क और आनंद एल राय निर्देशित तेरे इश्क में। जुनूनी आशिकी और मर-मिटने वाली मोहब्बत की दास्तान सुनाती तेरे इश्क में, एक बार फिर आनंद एल राय और धनुष की मजबूत जुगलबंदी को सामने लाती है। इस निर्देशक एक्टर की जोड़ी का जादू दर्शक पहले रांझणा में देख चुके हैं, और इस बार भी वही जुनून बड़े परदे पर साफ झलकता है। लेखक हिमांशु शर्मा और नीरज यादव के लिखे ‘मैं प्यार में पड़ गया तो दिल्ली फूंक दूंगा’ डायलॉग फ्रंट बेंचर्स को काफी पसंद आ रहे हैं। कहानी का केंद्र है (दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ) का अध्यक्ष शंकर (धनुष) अपनी दबंगई, गुस्सैल और हिंसक स्वभाव के कारण वह कॉलेज में हमेशा कोई न कोई कांड करता रहता है। उसी के कॉलेज में पढ़ने वाली मुक्ति बेनीवाली एक रिसर्च स्कॉलर है। समझदार और विचारशील मुक्ति अपनी थीसिस के जरिए साबित करना चाहती है कि एक हिंसक इंसान के मूल स्वभाव को भी बदला जा सकता है। वह शंकर को अपनी थीसिस का सब्जेक्ट बनाकर उससे दोस्ती बढ़ाती है, मगर शंकर को उससे प्यार हो चला है। मुलाकातों के बढ़ते सिलसिले में शंकर का गुस्सा और हिंसा तो कम होने लगती है, मगर मुक्ति के प्रति उसका जुनून बढ़ता जाता है। मुक्ति का दिल जीतने के लिए वह न केवल खुद को बदलता है बल्कि कई इम्तिहानों से भी पार पाता है, मगर जब उसे पता चलता है कि मुक्ति उसे प्यार नहीं करती तो वह ‘दिल जला है दुनिया जलाकर राख कर दूंगा’ के रवैये पर उतर आता है। सात साल बाद शंकर और मुक्ति की जिंदगी एक बार फिर करवट लेती है और दोनों को आमने-सामने कर देती है, मगर इस बार सिर्फ शंकर ही नहीं बल्कि मुक्ति भी उसके इश्क में लहू-लुहान हो चुकी है। इंटेंस प्रेम कहानियों को कहना आनंद एल राय को खूब आता है। तनु वेड्स मनु और रांझणा के बाद इस फिल्म की जुनूनी प्रेम कहानी में वो गहराई देखने को मिलती है। पहला भाग फिल्म का प्लस पॉइंट है, जहां निर्देशक बिना वक्त गंवाए पकड़ बना लेते हैं। पहले हिस्से में दो विपरीत पृष्ठभूमि से आए नायक-नायिका के बीच का टकराव, प्यार का पागलपन, दिल टूटना, मोहब्बत के लिए हदें पार करना, पिता और भाई के साथ इमोशनल कनेक्शन जैसे सारे एलिमेंट्स हैं, जो बांधे रखते हैं, मगर इंटरवल के बाद कहानी बिखरने लगती है और क्लाइमैक्स तक आते-आते थोड़ी फिल्मी हो जाती है। फिल्म का रन टाइम भी थोड़ा कम होता, तो और मजा आ जाता। बावजूद इसके फिल्म का तकनीकी पक्ष मजबूत है। कैमरा वर्क शानदार है। बैकग्राउंड स्कोर सब्जेजट को दमदार बनाता है। प्रोडक्शन डिजाइन विषय को खिला देता है, जबकि एआर रहमान के संगीत से उम्मीदें ज्यादा थीं, मगर ‘तेरे इश्क में’ और ‘जिगर ठंडा’ जैसे गाने ही याद रह पाते हैं। अभिनय की बात की जाए, तो सभी कलाकार अपना दमखम दिखाने में कामयाब रहे हैं। खास तौर पर धनुष फिल्म में तुरुप का इक्का साबित होते हैं। इश्क, वायलेंस, जुनून, आंसू, दर्द, पीड़ा और टूटन जैसे तमाम इमोशन से उन्होंने एक जुनूनी आशिक को पर्दे पर जिंदा कर दिया है। कृति सेनन भी अभिनय के मामले में उनके साथ बराबरी से कदम ताल करती नजर आती हैं। अपनी खूबसूरती के साथ-साथ उन्होंने अपनी क्षमता का भी पूरा परिचय दिया है। कम स्क्रीनस्पेस में मोहम्मद जीशान अयूबदिल जीत लेते हैं। प्रकाशराज और प्रियांशु पैन्यूलीने अपने किरदारों को गहराई दी है। इंटेंस और जुनूनी प्रेम कहानियों के शौकीन इस फिल्म को देख सकते हैं।

ऐक्टर: धनुष, कृति सेनन, मोहम्मद जीशान अयूब, प्रकाश राज
डायरेक्टर :आनंद एल राय
रेटिंग-3.5/5

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