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तंत्र साधना का महापर्व

दीवाली ज्योति पर्व के साथ साथ तंत्र साधना का महा पर्व भी है। हमेशा से दीवाली की रात तंत्र साधक अपनी महासाधना करते रहे हैं। आज भी देश में लाखों की तादाद में तांत्रिक हैं। इस साल कोरोना के डर से हो सकता है, तमाम तंत्र साधक पूर्वोत्तर या पश्चिम बंगाल न पहुंचे या कम संख्या में पहुंचें, मगर सामान्य दिनों में तो बड़े पैमाने पर देश के कोने कोने से तंत्र साधक दीवाली को कामरू प कामख्या, शक्ति मां तारा और ज्वाला देवी जाकर साधना करते रहे हैं।

बड़े पैमाने पर तंत्र साधक भैरव की साधनास्थली उज्जैन की भी इस दिन यात्रा में जाते हैं। दीवाली में दस महाविद्याओं की तंत्र साधना होती है। ये सभी महाविद्याएं शक्ति की अलग अलग देवियों से संबंधित हैं। ये हैं-काली, तारा, षोड्शी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, बगलामुखी, धूमावती, मातंगी और कमला। इन दस महाविद्याओं का प्राकट्य आद्या शक्ति सती के अंग से हुआ है। दसवीं महाविद्या कमला का प्राकट्य दिवस कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को हुआ था, इसीलिए यह दिन दीपावली पर्व के रूप में मनाया जाता है। तंत्र साधना का कोई एक मार्ग नहीं है।

तंत्र साधना विभिन्न मार्गों से की जाती है- वीर, शैव, कापालिक, पाशुपत, लिंगायन आदि। तंत्र साधना पद्घति में दक्षिण मार्गी और वाममार्गी दो पथ प्रमुख रूप से प्रचलित है। तंत्र ग्रन्थों में सात आचारों वर्णन है- वेदाचार, वैष्णवाचार शैवाचार, दक्षिणाचार, वामाचार, सिंद्घाचार तथा कौलाचार। तांत्रिकों की दुनिया में कौलाचार तांत्रिक को सर्वश्रेष्ठ तांत्रिक माना जाता है। कमला, महालक्ष्मी, लक्ष्मी श्री, पद्मावती, कमलाया आदि नामों से पूजित कमला तांत्रिकों की परम आराध्य देवी हैं। तंत्र और महाविद्या शक्ति के उपासक तांत्रिक महाविद्या की ही आराधना करते हैं।

काली, तारा, छिन्नमस्ता, भुवनेश्वरी और षोडशी को काली कुल की देवी माना जाता है जिनकी साधना उग्र और दु:साध्य होती है। भैरवी, बगला, धूमावती, मातंगी और कमला ये पांच श्रीकुल की महाविद्याएं हैं। इनकी साधना काली कुल की देवियों की तुलना में सरल तथा सुसाध्य होती है। जिस देवी या देवता की साधना पूजा करनी हो उसके मूल स्वरूप स्वभाव तथा उससे संबंधित संपूर्ण जानकारी अति आवश्यक है। पूजन के समय सर्वप्रथम ध्यान करने तथा ध्यान मंत्र श्लोक का उच्चारण इसी उद्देश्य से किया जाता है।

तंत्र की महा देवी कमला के आविर्भाव के बारे में कहा जाता है कि जब देवताओं तथा दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तब समुद्र से चौदह रत्न निकले जिनमें से एक मा कमला का प्राकट्य भी शामिल था। कमल पर आसीन कमला या लक्ष्मी के चार हाथ हैं, चार हाथी स्वर्ण कलशों में जल भर कर उनका अभिषेक कर रहें है, वह मणिमाणिक्य, दिव्य रत्न धारण किए हुए हैं। भगवती कमला के शिव भगवान नारायण गणेश सिद्ध, बटुक सिद्ध तथा यक्षिणी धनदा हैं। तंत्र विधान के अनुसार शक्ति के साथ उक्त चारों शक्तियों का पूजन तथा मंत्र जप करना चाहिए।

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