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एसबीआई ने हिंदी पखवाड़ा समापन एवं पुस्‍कार वितरण समारोह का किया आयोजन

“हमारी सामासिक संस्कृति की अभिव्यक्ति का माध्यम है हिंदी”: शरद सत्यनारायण चांडक

लखनऊ। भारतीय स्टेट बैंक, स्थानीय प्रधान कार्यालय लखनऊ में सोमवार को राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक एवं हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य महाप्रबंधक, शरद सत्यनारायण चांडक ने पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित छह प्रतियोगिताओं के साथ ही मंडल स्तरीय हिंदी निबंध प्रतियोगिता तथा चित्रांकन एवं कैलिग्राफ़ी प्रतियोगिता 3.0 के विजेताओं को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। इस क्रम में, मंडल प्रबंधन समिति द्वारा मंडल की त्रैमासिक पत्रिका “वातायन” के साथ ही राजभाषा ज्ञान पुस्तिका के पांचवें संस्करण का भी विमोचन किया गया।

राजभाषा ज्ञान पुस्तिका एक विशेष प्रस्तुति है जिसका लक्ष्य स्टाफ़ सदस्यों को राजभाषा संबंधी विभिन्न नियमों की जानकारी सरल, सहज शब्दों में एक जगह उपलब्ध कराना है। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य महाप्रबंधक, शरद सत्यनारायण चांडक ने कहा कि “हिंदी की ग्रहणशील प्रवृत्ति और वैज्ञानिकता संदेह से परे है। यही वह भाषा है जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक और गुजरात से सुदूर उत्तर पूर्व तक प्रत्येक भारतवासी को एक दूसरे से जोड़ने का काम करती है। हिंदी उन चुनिन्दा विश्व भाषाओं में है जिनमें उच्चारण और लिपि इस हद तक एकमेव है कि जैसा लिखा जाता है, वैसा ही बोला भी जाता है।

हिंदी की इन्हीं खूबियों ने इसे आम जन-मानस के हृदय में गहरा स्थान दे रखा है। आज हर क्षेत्र में हिंदी की सम्मानजनक उपस्थिति देखी जा सकती है। देश के हिंदीतर भाषी क्षेत्रों में भी हिंदी के प्रति स्नेहिल आकर्षण का भाव विद्यमान है, क्योंकि वे जानते और महसूस करते हैं कि भारत के प्रत्येक क्षेत्र एवं लोगों के आत्मसम्मान को बिना चोट पहुँचाये, इसकी सामासिक संस्कृति के सब तत्त्वों की अभिव्यक्ति का कोई सच्चा माध्यम हो सकती है तो वह हिंदी ही।“

इस अवसर पर महाप्रबंधक-प्रथम अनिल कुमार, महाप्रबंधक-द्वितीय एमएलवीएस प्रकाश एवं महाप्रबंधक-तृतीय कौशलेन्द्र कुमार ने भी उद्बोधन दिया। मंडल विकास अधिकारी, राजेश कुमार मीणा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए आगे भी इस तरह के कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं आयोजित करने की अपेक्षा राजभाषा विभाग से व्यक्त की। कार्यक्रम का संचालन सहायक महाप्रबन्धक (राजभाषा), दिवाकर मणि ने किया।

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