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सपना गोयल ने शिवरात्रि महापर्व पर विश्व शान्ति और राष्ट्र उन्नति के लिए किया पूजन

चिनहट मार्ग पर 12 से 15 फरवरी तक संचालित कांवड़ सेवा का हवन के साथ हुआ समापन

  • अगले वर्ष से पांच दूरस्थ स्थलों पर संचालित किए जाएंगे कावड़ सेवा केन्द्र
  • चित्रकूट में सामूहिक सुंदरकांड का पाठ सोमवार 10 मार्च 2026 को होगा

लखनऊ। ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की अगुवाई में शिवरात्रि के पावन अवसर पर चिनहट फैजाबाद मार्ग स्थित वीमार्ट के पास 12 से 15 फरवरी तक संचालित कावड़ सेवा का समापन हवन पूजन अनुष्ठान के साथ रविवार 15 फरवरी को हो गया। इस अवसर पर फलाहार जलपान, विश्राम, उपचार, शिव दरबार दर्शन आदि की सेवाएं उपलब्ध करवायी गईं। इसके साथ ही सुंदरकांड एवं स्वदेशी अभियान के प्रति राहगीरों को जागृत किया गया। दूसरी ओर सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने शिवरात्रि महापर्व के पावन अवसर पर विश्व शान्ति और राष्ट्र उन्नति के लिए रविवार 15 फरवरी को चिनहट स्थित श्री परमानंद हरि हर मंदिर परिसर में पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मातृशक्तियों ने पूजन-अर्चन कर प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने घोषणा की कि अगले वर्ष से शहर के पांच दूरस्थ स्थल जैसे पीजीआई, विकास नगर, अयोध्या मार्ग आदि पर कांवड़ सेवा केन्द्र संचालित किये जाएंगे। उन्होंने सनातनियों का आवाहन किया कि बड़ें मंगल की तर्ज पर कावड़ सेवा केन्द्रों का संचालन किया जाना चाहिए क्योंकि इस आध्यात्मिक यात्रा में शहर ही नहीं दूर-दूर से आने वाले भक्तगण शामिल होते हैं। ऐसे में जो कांवड़ियों की कठिन पदयात्रा की सेवा करता है वह भी पुण्य और सौभाग्य का भागीदारी बनता है। उन्होंने संदेश दिया कि जीवन एक आध्यात्मिक यात्रा है और आत्म अध्ययन ही आध्यात्म है। इसलिए शिवरात्रि का महापर्व, अंधकार और अज्ञानता का नाश करके आध्यात्मिक जागृति का पर्व है। शिवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व है। इस समय भगवान ने, अपने निराकार रूप से साकार रूप में, प्रवेश किया था। उन्होंने अपना अस्तित्व शिवलिंग के रूप में प्रकट किया था। महा शिवरात्रि पर्व पर शिव और शक्ति के मिलन से ही सृष्टि की रचना हुई थी। इसलिए यह ज्ञान के प्रकाश का पर्व है।। सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने बताया कि उनका एक ही लक्ष्य है कि संतों और देवों की पावन भूमि भारत, दोबारा विश्व गुरु बने। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही सुंदरकांड महा अभियान का संचालन किया जा रहा है। बिना किसी सरकारी या निजी सहयोग के 10 मार्च 2024 को महिला दिवस के उपलक्ष्य में पांच हजार से अधिक मातृशक्तियों द्वारा लखनऊ के झूलेलाल घाट पर सामूहिक सुंदरकांड का भव्य अनुष्ठान सम्पन्न करवाया गया था। इस क्रम में जिलों से दिलों तक को जोड़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर तीर्थाटन का सिलसिला भी शुरू किया गया है। इसके तहत उत्तराखंड कोटद्वार के प्राचीन सिद्धबली मंदिर, नैमिषारण्य तीर्थ, काशी विश्वनाथ मंदिर, हर की पौड़ी हरिद्वार, रुड़की महादेव मंदिर और प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान मंदिर परिसर एवं कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर के गंगा जी घाट परिसर में भी भव्य सुंदरकाण्ड का पाठ सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इसके साथ ही बीते साल 11 सितम्बर से अयोध्या जी में प्रभु राम जी की जन्मभूमि परिसर में भी, मासिक सुंदरकांड पाठ का सिलसिला शुरू हो गया है। स्वदेशी अभियान का संदेश भी वृहद रूप से संचालित किया जा रहा है।

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