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पुस्तक ‘तुम्हरे हमरे राम बराबर’ का विमोचन

यूपी प्रेस क्लब में हुआ विमोचन कार्यक्रम
लखनऊ। पुस्तक तुम्हरे हमरे राम बराबर, इस बात का सुबूत है कि आज भी अभिव्यक्ति की पूरी आजादी है। यह बात स्माईलमैन कहे जाने वाले हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने कही। सोमवार को यूपी प्रेस क्लब में वरिष्ठ पत्रकार एसडी.बडोला की लिखी पुस्तक तुम्हरे हमरे राम बराबर, का विमोचन समारोह धूमधाम से मनाया गया। पुस्तक का विमोचन बतौर मुख्य अतिथि मौजूद कवि सर्वेश अस्थाना, वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र भदौरिया, जेपी.शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार व उर्दू के साहित्यकार अहमद इब्राहिम अल्वी, सुधीर मिश्रा और वरिष्ठ पत्रकार शिवशरण सिंह की मौजूदगी में किया गया।
प्रेमकांत तिवारी के संचालन में हुए विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने पुस्तक तुम्हरे हमरे राम बराबर के शीर्षक पर कहा कि इस शीर्षक पर गीत और गजल भी लिखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि जब कोई लेखक किताब लिखता है तो उसके पीछे बिक्री और पहचान बनाने का उद्देश्य होता है मगर श्री बडोला ने पुस्तक में अपने ह्दय में उठते आंधी तूफान को सामने रखा है। उनकी लेखनी में निर्भीकता दिखती है क्योंकि उन्होंने पुस्तक में अखिलेश यादव से लेकर सोनिया गांधी की राजनीति तक का जिक्र किया है। समारोह में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार व उर्दू साहित्यकार अहमद इब्राहिम अल्वी ने कहा कि अखबार में लेखक के बारे में भी लिखना चाहिए कि वह कितनी दुश्वारियों के बीच समाज का आईना दिखाता है। उन्होंने लेखक एसडी.बडोला को बेहद संजीदा व्यक्तित्व का इंसान बताया और कहा कि उम्मीद है कि यह पुस्तक समाज का रुख बदलेगी। वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र भदौरिया ने कहा कि हमको गर्व होता था कि हम सभ्यता के शिखर पर हैं मगर यह हमारी गलतफहमी है, आज हमारी सभ्यता खत्म होती जा रही है। सच्चाई यह है कि आज हम स्वंय को ही नहीं पहचान पा रहे हैं। उन्होंने एसडी.बडोला को शब्द साधक बताते हुए कहा कि यह किताब रिश्तों को बचाने में अहम योगदान देगी। नरेन्द्र भदौरिया ने कहा कि आज हमको अपने सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने की सख्त जरूरत है। इसी क्रम में सुधीर मिश्रा ने पुस्तक के शीर्षक की प्रशंसा और उसकी सफलता की कामना करते हुए कहा कि हमको भगवान राम का बंटवारा नहीं करना चाहिए। पुस्तक विमोचन की अध्यक्ष्ता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार जेपी.शुक्ला ने कहा कि एसडी.बडोला की पुस्तक तुम्हरे हमरे राम बराबर की समीक्षा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में किसी न किसी की रुचि की कोई कविता जरूर मिलेगी।

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