रवीन्द्रालय चारबाग में लखनऊ पुस्तक मेला : दूसरा दिन
लखनऊ। रवीन्द्रालय में चल रहे लखनऊ पुस्तक मेले में अध्यात्म की पुस्तकें खूब हैं तो यहां भगत सिंह की मैं नास्तिक हूं जैसी किताबें भी युवा खरीद रहे हैं। पुस्तक मेले का आज दूसरा दिन था। छुट्टी का दिन होने के नाते मेले में दिनभर चहल पहल बनी रही। शिक्षक और स्कूल प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति बड़ी तादाद में किताबें ले जाते दिखायी दिये। नि:शुल्क प्रवेश वाले इस मेले में हर किताब पर कम से कम 10 प्रतिशत छूट दी जा रही है।
नेशनल बुक ट्रस्ट के अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि स्टाल से भगत सिंह की मैं नास्तिक हूं, बच्चों की वैदिक मैथमेटिक्स, दि स्टोरी आफ अवर रिवर्स जैसी किताबों की बिक्री खूब हो रही है। इसके अलावा हमारी उर्दू की किताबें भी लखनऊ में पसंद की जा रही हैं। आज सुबह मंच पर नवसृजन प्रकाशन की ओर से महेश चन्द्र द्विवेदी की अध्यक्षता में हुए समारोह में डा.उषा सिन्हा, सुल्तान शाकिर हाशमी, नरेन्द्र भूषण, ओम नीरव ने मंजू सक्सेना के लघुकथा संग्रह एक कप चाय, श्रीकृष्ण द्विवेदी द्विजेश के छन्द संग्रह छाया बसन्त रहे, हेमंत कुमार के निबन्ध संग्रह अवध का लोक इतिहास, डा. सुषमा सौम्या के गीत संग्रह नमन, अनिल किशोर शुक्ल के काव्य संग्रह मेरे अष्टपदी अगीत तथा मनोरमा श्रीवास्तव के गजल संग्रह तितलियों के देश में का विमोचन किया। समारोह में मनु वाजपेयी, डा.योगेश, देवेश द्विवेदी व डा सुधा मिश्रा की भी उपस्थिति रही। डा.शिप्रा चतुवेर्दी की किताब जर्मन लोककथाएं पर लोकतत्वों और बेटी, कासपर हाउजर, हाइडी जैसी कहानियों से पर चर्चा चली। अभय, अदम्य, प्रांजल और सृष्टि ने संग्रह की कथा टिल का मंचन किया। इसी क्रम में डा.अश्विनी कुमार मल्होत्रा ने अपनी एक डाक्टर की कलम से और दो अन्य पुस्तकों के बारे में जयश्री और श्रोताओं के साथ चर्चा की। वास्तुविद विपुल वार्ष्णेय की किताब अवध के मंदिर के लोकार्पण एवं चर्चा पद्मश्री डा विद्या विंदु सिंह की अध्यक्षता और चंद्र शेखर वर्मा के संचालन में चली। परिचर्चा में डा.आनंद प्रकाश मेंमाहेश्वरी, लेखिका विपुल वार्ष्णेय और पुस्तक की हिंदी में भूमिका लिखने वाली अलका प्रमोद शामिल हुईं। शाम को साहित्य साधक संस्था की काव्य गोष्ठी आयोजित की गयी।





