लखनऊ। सभी एकादशी में पापमोचनी एकादशी को विशेष माना जाता है। इसके प्रभाव से साधक के पापों का नाश होता है और वह मोक्ष प्राप्त करता है। हिंदू धर्म में इस व्रत को विष्णु जी की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर यह उपवास किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति के दुखों का अंत होता है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ने लगती हैं। वर्तमान में चैत्र महीना जारी है। एकादशी तिथि का प्रारंभ 14 मार्च को सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन 15 मार्च को सुबह में 9 बजकर 16 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन श्रवण नक्षत्र और परिध योग का संयोग बना रहेगा। 16 मार्च को 9 बजकर 30 मिनट पर द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाएगा।
पापमोचनी एकादशी व्रत का महत्व
पापमोचनी एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति का प्रमुख साधन माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु की आराधना से रोग, शोक, दुख और नकारात्मकता दूर होती है। यह व्रत भाग्य वृद्धि, सौभाग्य और पुण्य फल प्रदान करता है। विशेष रूप से अनजाने पापों (जैसे छोटी-छोटी गलतियां) से मुक्ति के लिए यह एकादशी सर्वोत्तम है। व्रत रखने से मन शुद्ध होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्तों को विष्णु भक्ति और तुलसी सेवा का विशेष महत्व है।
पापमोचनी एकादशी की पूजा विधि
पापमोचनी एकादशी की पूजा के लिए एक साफ चौकी पर विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। अब प्रभु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें और साथ ही फूलों की माला भी पहनाएं। इसके बाद चौकी के पास साफ कलश में जल भरकर तुलसी दल डालें। इस दौरान एक सिक्का, बताशा और सुपारी भी लोटे में डालें और इसे विष्णु जी के पास रख दें। अब आप घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद ‘ॐ विष्णवे नम:’ मंत्र का स्मरण करते हुए पंचामृत का भोग लगाएं। इस दौरान गुड़ और चना भोग के रूप में अर्पित अवश्य करें। इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अब आप विष्णु चालीसा का पाठ करें और आरती करते हुए पूजा का समापन करें।
पापमोचनी एकादशी पर विशेष उपाय
इस दिन कुछ सरल उपाय करने से पाप मुक्ति और सौभाग्य वृद्धि होती है: तुलसी माता के सामने घी का दीपक जलाएं और तुलसी की सेवा करें। तुलसी का पौधा दान करें, इससे सौभाग्य बढ़ता है। भगवान विष्णु के मंदिर में दर्शन करें और प्रसाद ग्रहण करें। पीला वस्त्र पहनकर पीले फूल और पीला भोग अर्पित करें। 9 बाती का दीपक जलाकर कनकधारा स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। दान-पुण्य करें, जैसे गरीबों को अन्न या वस्त्र दें। ये उपाय श्रद्धापूर्वक करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और जीवन में शांति व समृद्धि आती है।
पापमोचनी एकादशी का संदेश
पापमोचनी एकादशी हमें सिखाती है कि पापों से मुक्ति संभव है, यदि हम सच्चे मन से भगवान की शरण लें। यह व्रत ना केवल पाप नाश करता है, बल्कि स्वास्थ्य, धन, सुख और मोक्ष प्रदान करता है। इस साल 15 मार्च को पापमोचनी एकादशी व्रत रखकर भक्त अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं।





