गाजियाबाद। गाजियाबाद के भारत सिटी सोसाइटी में तीन नाबालिग बहनों द्वारा की गई आत्महत्या के मामले में एक भावुक कर देने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस को मृतका बहनों के कमरे से नौ पन्नों की एक पॉकेट डायरी मिली है, जिसमें उनकी काल्पनिक दुनिया के प्रति लगाव और घरेलू तनाव की गहरी दास्तां दर्ज है। 16 वर्षीय निशिका, 14 वर्षीय प्राची और 12 वर्षीय पाखी ने मंगलवार देर रात नौवीं मंजिल से कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। डायरी के पन्नों से पता चलता है कि तीनों बहनें कोरियाई संस्कृति और कलाकारों से बेहद प्रभावित थीं और उसे ही अपनी असली दुनिया मानती थीं, लेकिन परिवार द्वारा उन पर अपनी इस पसंद को छोड़ने और भविष्य के फैसलों को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
डायरी में दर्ज संदेशों में लड़कियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा है कि कोरियाई संस्कृति ही उनकी जिंदगी थी, लेकिन उनके माता-पिता उन्हें इसे छोड़ने और अपनी मर्जी के खिलाफ शादी करने के लिए मजबूर कर रहे थे। एक दर्दनाक संदेश में उन्होंने अपने पिता को संबोधित करते हुए लिखा, “आपकी मार से हमारे लिए मौत बेहतर है, इसी वजह से हम आत्महत्या कर रहे हैं।” डायरी में अपनी पसंद और पहचान के लिए लड़ने की छटपटाहट और अंत में हार मान लेने की बेबसी साफ झलक रही है। पुलिस उपायुक्त निमिष पाटिल के अनुसार, इस डायरी को साक्ष्य के तौर पर कब्जे में ले लिया गया है और हर पहलू से जांच की जा रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में ये बातें लिखी गईं।
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वहीं, इस दुखद घटना के पीछे एक गहरा आर्थिक संकट भी सामने आ रहा है। स्थानीय रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अनुसार, लड़कियों के पिता चेतन शेयर बाजार में भारी नुकसान के कारण गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। बताया जा रहा है कि उन पर दो करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज था और हालात इतने खराब थे कि उन्हें बिजली का बिल भरने के लिए अपना मोबाइल तक बेचना पड़ा था। इस तंगी की वजह से घर में अक्सर झगड़े और तनाव का माहौल रहता था। बुधवार शाम को दिल्ली के निगम बोध घाट पर तीनों बहनों का अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आर्थिक स्थिति के आधार पर मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि मौत के सटीक कारणों और पारिवारिक दबाव की कड़ियों को जोड़ा जा सके।





