परशुराम जी का जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था
लखनऊ। परशुराम जयंती भगवान विष्णु के छठे अवतार को समर्पित है। इस दिन परशुराम भगवान की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन परशुरामजी के भक्त उनकी पूजा करते हैं और व्रत भी रखते हैं। भगवान परशुरामजी से सुख समृद्धि की कामना भी करते हैं। वैसे तो परशुराम जी का जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था। लेकिन, धर्म की रक्षा करने के लिए उन्होंने शस्त्र उठाएं थे, इसलिए धर्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय भी माने जाते हैं और इस संदर्भ में इनके जन्म की एक रोचक कथा भी है। परशुराम जयंती वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है इसी दिन अक्षय तृतीया भी मनाने की परंपरा रही है। पंचांग की गणना के अनुसार, 19 अप्रैल रविवार के दिन सुबह में 10 बजकर 50 मिनट पर तृतीया तिथि का आरंभ होगा और 20 अप्रैल को सोमवार के दिन सुबह में 7 बजकर 28 मिनट पर तृतीया तिथि समाप्त हो जाएगी। 19 अप्रैल को तृतीया तिथि सुबह, दोपहर और शाम तीनों समय व्याप्त हो रही है। ऐसे में अक्षय तृतीया तिथि 19 तारीख को तीनों समय रहने के कारण परशुराम जयंती का पर्व 19 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। वैसे शास्त्रों का मत है कि, भगवान परशुरामजी का जन्म वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में प्रदोष काल में हुआ था। इसलिए जिस दिन प्रदोष काल में वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि व्याप्त हो उसी दिन परशुराम जंयती मानई जानी चाहिए। – वैशाख सिते पक्षे तृतीयां पुनर्वसौ। निशाया: प्रथमयामे समाख्या: समये हरि:।। इसी नियम के अनुसार इस साल 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन ही परशुराम जयंती मानाने का विधान बन रहा है।
परशुराम जयंती की पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर पूजा करने का संकल्प लें। इसके बाद घर या मंदिर में भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। इसके बाद सबसे पहले परशुराम जी को तिलक लगाएं। अब अक्षत, फूल, और तुलसी अर्पित करें। अब परशुराम जी के मंत्रों का जप करें या भगवान विष्णु की स्तुति करें। अंत में परशुराम भगवान की आरती करें। इस दिन अक्षय तृतीया भी है तो जरुरतमंद लोगों को दान पुण्य भी करें तो आपको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी।
भगवान परशुराम को परशु किसने दिया था ?





