देहरादून। नमामि गंगे को देश का सबसे बड़ा और विस्तृत नदी संरक्षण कार्यक्रम बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि आज देश उस दौर से निकल चुका है जब पैसा पानी की तरह बह जाता था, लेकिन नतीजे नहीं मिलते थे। अब पैसा पानी की तरह नहीं बहता, बल्कि पाई-पाई पानी पर लगाया जाता है।
महत्त्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना के तहत उत्तराखंड में हरिद्वार, ऋषिकेश, मुनि की रेती और बद्रीनाथ में सीवरेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) और गंगा संग्रहालय समेत छह परियोजनाओं का नई दिल्ली से डिजिटल तरीके से लोकार्पण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ये बातें कहीं- आज देश उस दौर से बाहर निकल चुका है जब पैसा पानी की तरह बह जाता था लेकिन नतीजे नहीं मिलते थे। अब पैसा न पानी की तरह बहता है, न पानी में बहता है, बल्कि पाई-पाई पानी पर लगाया जाता है।
मोदी ने कहा कि बीते दशकों में गंगा की निर्मलता को लेकर बडेबडे अभियान शुरू किए गए जिनमें न तो जनभागीदारी थी और न ही दूरदर्शिता और उसका नतीजा यह हुआ कि गंगा का पानी कभी साफ ही नहीं हो पाया। उन्होंने कहा, अगर गंगाजल की शुद्धता को लेकर वही पुराने तौर तरीके अपनाए जाते तो आज भी हालत उतनी ही बुरी रहती। लेकिन हम नई सोच से आगे बढे। हमने नमामि गंगे मिशन को केवल गंगा की साफसफाई तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे देश का सबसे बड़ा और विस्तृत नदी संरक्षण कार्यक्रम बनाया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने चारों दिशाओं में एक साथ काम आगे बढाया। पहला, गंगा में गंदा पानी रोकने के लिए एसटीपी का जाल बिछाना शुरू किया, दूसरा, ऐसे एसटीपी बनाए जो अगले 1015 साल की जरूरत भी पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि तीसरा कार्य गंगा के किनारे बसे 100 बड़े शहरों और 5000 गांवों को खुले में शौच से मुक्त करना और चौथा गंगा की सहायक नदियों में भी प्रदूषण रोकने के लिए पूरी ताकत लगाना है।
मोदी ने कहा कि आज 30,000 करोड़ रुपये की लागत से गंगा परियोजनाओं पर काम चल रहा है या पूरा हो चुका है। उत्तराखंड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में इस अभियान के तहत बडी परियोजनाएं करीबकरीब पूरी हो चुकी हैं और पिछले छह वर्षों में ही उत्तराखंड में एसटीपी की क्षमता चार गुना हो चुकी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ से लेकर हरिद्वार तक गंगा नदी में 130 नाले गिरते थे जिनमें से अधिकतर को रोक दिया गया है। इनमें ऋषिकेश से सटे मुनि की रेती क्षेत्र का चंद्रेश्वर नगर नाला भी शामिल है। उन्होंने कहा कि आज से चंद्रेश्वर नगर में देश का पहला चार मंजिला सीवरेज संयंत्र शुरू हो चुका है। हरिद्वार में भी ऐसे 20 से ज्यादा नालों को बंद किया जा चुका है।







