नयी दिल्ली। सरकार ने शुक्रवार को कहा कि देश के विभिन्न अनुसंधान संस्थानों व कृषि विश्वविद्यालयों में धान, गेहूं, सरसों, मक्का, टमाटर सहित कई फसलों पर नैनो नाइट्रोजन (नैनो यूरिया) का प्रायोगिक परीक्षण किया गया जिससे पता चलता है कि नैनो यूरिया नाइट्रोजन की बचत के साथ उपज को 50 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि विशिष्ट गुणों के कारण नैनो-उर्वरक में पौधों के पोषण में अनुप्रयोग करने की अत्यधिक संभावना है। नैनो-उर्वरक नियंत्रित तरीके से पादप पोषकतत्व छोड़ते हैं जिसके कारण पोषकतत्वों की क्षमता का अपेक्षाकृत अधिक उपयोग हो पाता है।
मांडविया ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि सात आईसीएआर अनुसंधान संस्थान व राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के माध्यम से 2019-20 के दौरान विभिन्न फसलों जैसे धान, गेहूं, सरसों, मक्का, टमाटर, पत्तागोभी, खीरा, शिमला मिर्च, प्याज आदि पर नैनो यूरिया का प्रायोगिक परीक्षण किया गया जिसे कृषि विज्ञान की दृष्टि से उपयुक्त पाया गया। परीक्षण से यह पता चलता है कि नैनो यूरिया नाइट्रोजन की बचत के साथ किसानों की फसल उपज को 50 प्रतिशत की सीमा तक बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि उर्वरक विभाग के सर्वावजनिक उपक्रम नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और राष्ट्रीय केमिकल्स एण्ड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड ने इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर्स कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) के साथ नैनो यूरिया के उत्पादन की खातिर प्रौद्योगिकी अंतरण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि इफको ने कलोल, गुजरात में स्थापित अपनी नैनो उर्वरक संयंत्र इकाई में तैयार नैनो यूरिया (तरल) के निर्यात के लिए उर्वरक विभाग से अनुमति मांगी है।





