वरिष्ठ संवाददाता लखनऊ। 62 साल तक नौकरी करने के बाद अब डॉक्टर भी अपनी जिन्दगी अपने हिसाब से जीना चाहते हैं। कोई बच्चों के साथ विदेश सेटेल होने की तैयारी में हैं तो कोई उम्र के इस पड़ाव में सेहत से लाचार है। इन तमाम कारणों से कई चिकित्सक चाहते हैं कि उन्हें स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति का विकल्प दिया जाये। वहीं सरकार डॉक्टरों से अभी तीन साल और काम कराने का मूड बना चुकी है।
सरकारी अस्पतालों में डाक्टर लगातार कम होते जा रहे हैं। इस करीब 370 डॉक्टर और रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में सरकार ने डॉक्टरों की रिटायरमेंट आयु 62 से बढ़ाकर 65 करने का फैसला किया है। 62 की उम्र में रिटायर होने वाले डॉक्टर पहले से ही अपनी सेवानिवृत्ति के बाद विकल्पों की तैयारी कर चुके हैं। मौजूदा समय में कई प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी निभा रहे डॉक्टरों का का कहना है कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से पहले कई बिन्दुओं पर गौर करना होगा। जैसे कि नौकरी करने जबरन दबाव न डाला जाये, 62 की आयु पूरी कर चुके जो डॉक्टर रिटायरमेंट चाहते हैं, उन्हें इसका विकल्प देना चाहिए। वहीं रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के साथ प्रशासनिक पावर भी मिलनी चाहिए।
इसके साथ जो लेवल 5 और 6 के पद से रिटायर होने वाले हैं। सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने पर उनके लिए भी कोई विकल्प रखना होगा। चिकित्सकों का कहना है कि इन तमाम पहलुओं पर गौर करने के बाद ही सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर विचार करना उचित होगा। कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने तो नाम पर छापने की शर्त पर यहां तक कहा है कि यदि सरकार जबरन उनसे काम करायेगी तो वह न्यायालय में गुहार लगायेंगे। वहीं कई डाक्टर विभिन्न कारणों से पहले ही वीआरएस मांग रहे हैं, जिनके आवेदन करीब दो-तीन सालों से अनुमति के इंतजार में अटके है।





