छोटे पर्दे पर काम से मिल रही संतुष्टि : मंजू बृजनंदन शर्मा
भारतीय सेना में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली मंजू बृजनंदन शर्मा आज टीवी शो का जाना-माना नाम है। कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में मंजू बृजनंदन शर्मा बिंदु की मम्मी समेत कई किरदार निभाकर दर्शकों को लोट-पोट कर चुकी हैं। उनका मानना है कि फिल्मों में अब कुछ खास नहीं रहा, उसमें मां-बहनों के किरदार दिखाई ही नहीं देते। वहीं छोटे पर्दे पर काम करने से संतुष्टि मिलती हैं। लखनऊ में आयोजित बीएनए के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होने आईं मंजू बृजनंदन शर्मा ने बातचीत के दौरान अपने अनुभव को साझा किया। बताया कि बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में डॉक्टर बनने का था, इसका कारण उनके पापा बृजनंदन शर्मा का आर्मी में होना भी रहा। इसके लिए उन्होंने बीएससी बायोलॉजी से किया। लेकिन बाद में लिटरेचर और ड्रामा किया। एमए संस्कृत से करने के दौरान ही पहली बार नाटक अभिज्ञान शाकुंतलम में शकुंतला का किरदार निभाया। इसके साथ ही नाटकों में रुझान आ गया। बीएनए से 1999 बैच की पासआउट रहीं। मंजू ने बताया कि उन्होंने करीब 40 नाटकों में काम किया है। सबसे खास ताजमहल का टेंडर और कशमकश रहा। इसके अलावा तीन फिल्मों शोबिज, लव का तड़ाका और गलती से मिस्टेक हो गई… में नजर आ चुकी हैं। फिर छोटे पर्दे पर आने का मन बना लिया। मंजू धारावाहिक ‘परसाई कहते हैं’ सब टीवी पर आने वाले एफआईआर और उसके बाद कॉमेडी नाइट्स कपिल में आईं। मंजू ने कहा कि नाटक करते रहना चाहिए। उनके पापा ने भी थियेटर किया, वह हमेशा से मेरी प्रेरणा रहे। एक सवाल के जबाव में कहा कि फिल्मों में अब कुछ खास नहीं रहा। उनमें मां-बहनों के किरदार दिखाई ही नहीं देते। जबकि छोटे पर्दे पर पारिवारिक माहौल बना रहता है, इसलिए यहां काम करने से संतुष्टि मिलती हैं। उन्होंने राजनीति में आने की संभावनाओं से भी इन्कार नहीं किया गया। उन्होंने नए कलाकारों के लिए कहा कि वह आज के समय में थियेटर के लिए रिसर्च कर सकते हैं, पहले यह संभव नहीं था।
1975 में पड़ी थी बीएनए की नींव
अकादमी की स्थापना वर्ष 1975 में महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र की स्मृति में की गई थी। वर्ष 1976 से यहां नाट्य कला का व्यवस्थित प्रशिक्षण शुरू हुआ। 1981 में दो वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया, जिससे यह संस्थान देश के प्रमुख नाट्य प्रशिक्षण केंद्रों में शामिल हो गया। अकादमी के संस्थापक अध्यक्ष अमृतलाल नागर और संस्थापक निदेशक राज बिसारिया के प्रयासों से उत्तर भारत में आधुनिक रंगमंच को नई दिशा मिली। उन्होेंने बताया कि बीएनए में अभिनय, वॉइस एवं स्पीच, माइम, इम्प्रोवाइजेशन, स्टेज क्राफ्ट, लाइट डिजाइन, निर्देशन और प्रोडक्शन जैसे विभिन्न पहलुओं में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां भारतीय और पाश्चात्य रंगमंच का समग्र अध्ययन कराया जाता है। अकादमी में आधुनिक स्टूडियो थिएटर, दो सुसज्जित आॅडिटोरियम, पुस्तकालय, आॅडियो-विजुअल संसाधन, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही विद्यार्थियों को फिल्म और टीवी प्रोडक्शन का प्रारंभिक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के अवसर भी दिए जाते हैं।





