‘सिनेमा, कविता और हाशिये का समाज’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन
लखनऊ। मुंबई जैसे बड़े शहरों में छोटे-छोटे स्थानों से आए लोगों ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर विशिष्ट पहचान स्थापित की है। वर्तमान समय में सिनेमा जगत भी गांवों, कस्बों और वहां के सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं को प्राथमिकता दे रहा है, जो वास्तव में एक सराहनीय और सकारात्मक परिवर्तन है। इससे न केवल क्षेत्रीय कथाओं को मंच मिल रहा है। बल्कि जमीनी वास्तविकताओं को आम लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। ये बातें मुंबई के प्रसिद्ध गीतकार डॉ.सागर ने मंगलवार को बीबीएयू के अर्थशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित सिनेमा, कविता और हाशिये का समाज विषयक व्याख्यान में कही। उन्होंने युवाओं को निरंतर अध्ययन, संवेदनशील दृष्टिकोण और समकालीन विषयों की समझ विकसित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि यदि लेखन में ईमानदारी, समाज के प्रति संवेदनशीलता और सतत अभ्यास हो, तो सफलता अवश्य प्राप्त की जा सकती है। आईएएस अधिकारी योगेश कुमार ने कहा कि किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अपना सर्वोत्तम देना आवश्यक है। आधे-अधूरे मन से किया गया प्रयास कभी उत्कृष्ट परिणाम नहीं दे सकता। उन्होंने आॅरेंज इकॉनामी का उल्लेख करते हुए कहा कि रचनात्मकता, कला, मीडिया, फिल्म, डिजाइन और सांस्कृतिक उद्योगों से जुड़ा यह क्षेत्र आज तेजी से उभर रहा है। इस मौके पर गायक हंसराज, अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सनातन नायक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रणब कुमार आनंद ने विचार साझा किये।





