लखनऊ। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, जो विशेष रूप से भगवान शिव तथा माता पार्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से शिव परिवार की उपासना और व्रत से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। शास्त्रों की मानें, तो मासिक शिवरात्रि केवल एक व्रत ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का अवसर है। इस दिन शिवभक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि, जो व्यक्ति नियमित रूप से मासिक शिवरात्रि का व्रत करता है, उसके जीवन के कष्ट धीरे-धीरे समाप्त हैं। वहीं वैशाख माह की मासिक शिवरात्रि का भी विशेष महत्व होता है। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 अप्रैल 2026 को रात 10 बजकर 31 मिनट पर प्रारंभ होगी।
इस तिथि का समापन 16 अप्रैल 2026 को शाम 8 बजकर 11 मिनट पर होगा।
निशिता काल के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत 15 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।
मासिक शिवरात्रि का महत्व
सनातन धर्म में मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से कुवांरी कन्याओं को मनचाहा वर और विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती की एक साथ पूजा करने से जीवन के सभी दुख और बाधाएं दूर होती हैं।
मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि पर पूजा के लिए सबसे पहले शिवलिंग और शिव परिवार को पंचामृत से स्नान कराएं। अब साफ जल से अभिषेक करें। महादेव को 11 बेलपत्र अर्पित करें और इसी के साथ शमी का फूल, धतूरा, फल, और इत्र अर्पित करें। अब गेहूं व चावल के कुछ दाने लेकर ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें और भगवान शिव को इसे चढ़ा दें। इसके बाद शिव जी के पास शुद्ध देसी घी से दीपक जलाएं और धूपबत्ती भी जला लें। शिव चालीसा पढ़ें और अंत में आरती करते हुए सफेद चीजों का दान कर दें।





