back to top

मित्रता और दानशीलता का उदाहरण है ‘कर्णभारम’

बौद्ध शोध संस्थान में नाटक का मंचन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम व अग्रसर सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था की ओर से नाटक कर्णभारम का मंचन बौद्ध शोध संस्थान में किया गया। नाटक का परिकल्पना व निर्देशन संतोष कुमार प्रजापति ने किया।
कर्णभारम नाटक संस्कृत के महाकवि भास रचित एक अत्यंत मार्मिक प्रसंग है, जिसमें महाभारत युद्ध के पंद्रहवें दिन महान आचार्य द्रोणाचार्य वीरगति को प्राप्त हो जाते है उसके बाद कौरव सेना का प्रधान सेनापति कर्ण को नियुक्त किया जाता है। युद्ध के सोलहवें दिन कर्ण अपने सारथी मद्रदेश के राजा शल्य के साथ रणभूमि की ओर जा रहे है। सारथी शल्य और कर्ण के बीच जो भी संवाद हुआ वही इस नाटक में दिखाया गया है।
आज कर्ण के मन में बहुत भार है क्योंकि उसे मालूम है कि वह अपने ही अनुजों से युद्ध करने जा रहा है। कर्ण अपने जीवन के कई प्रसंग बताता है पहला प्रसंग बताता है कि कैसे मेरे गुरू परशुराम जी को आभास हो जाता है कि मैं क्षत्री हूँ तब वो क्रोधित होकर श्राप देते है कि “जब तुम्हे मुझसे प्राप्त की हुई शिक्षा की सर्वाधिक आवश्यकता होगी तब यह विद्या तुम्हारे किसी काम नहीं आयेगी। युद्ध आरम्भ होने से पहले मुझे हराने के लिए कैसे कृष्ण और मेरे जन्मदात्री माता कुंती मुझे संसार पर राज्य करने का प्रलोभन देती है और मुझसे दान मांगती है तब मै उनको यह वचन दे देता हूँ कि आप पाँच पुत्रों की माता कहलाती है तो आपके पाँचों पुत्र जीवित रहेंगे। आगे बताता है कि इंद्र ने कैसे वेश बदल कर मुझसे जन्मजात मेरे कवच और कुंडल मांग ले गये। और अंत में महानयोद्धा कर्ण संसार का राज्य त्यागकर दुर्योधन का ऋण चुकाने के लिए अर्जुन से युद्ध करने लगता तब उसे अपने दोनों आप याद आते है और रथ का पहिला निकालते समय कृष्ण के उकसाने पर निहत्थे कर्ण पर अर्जुन बाण चला देता है। अंतिम क्षणों कृष्ण और अर्जुन वेश बदलकर कर्ण से दान मांगते है तब कर्ण अपना एक सोने का दांत दान करता है और वीरगति को प्राप्त हो जाता है। नाटक में अहम भूमिका मनोज तिवारी, मनदीप मौर्य, अभिषेक सिंह, सुरेश श्रीवास्तव, उन्नत बहादुर, तरूण यादव आदि ने किया।

RELATED ARTICLES

चैत्र नवरात्र : पूजा सामग्री से पटे बाजार, सजने लगे शहर के देवी मंदिर

लखनऊ। चैत्र नवरात्र के पहले बाजार में लोगों माता के श्रृंगार और पूजन का सामान खरीदा। बाजार में खरीदारी करने आए लोगों को देखकर...

वैश्य समाज ने गोसेवा के साथ मनाया एकता दिवस, सेवा वर्ष की शुरूआत

इंटरनेशनल वैश्य फेडरेशन के संस्थापक रामदास अग्रवाल की जयंती पर आयोजन लखनऊ। इंटरनेशनल वैश्य फेडरेशन के संस्थापक रहे रामदास अग्रवाल की जयंती वैश्य एकता दिवस...

सुभागी में दिखी स्त्री के आत्मसम्मान की कहानी

15 दिवसीय संस्कृत प्रशिक्षण नाट्य कार्यशाला का समापनलखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान और रंगनाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय संस्कृत प्रशिक्षण नाट्य...

चैत्र नवरात्र : पूजा सामग्री से पटे बाजार, सजने लगे शहर के देवी मंदिर

लखनऊ। चैत्र नवरात्र के पहले बाजार में लोगों माता के श्रृंगार और पूजन का सामान खरीदा। बाजार में खरीदारी करने आए लोगों को देखकर...

वैश्य समाज ने गोसेवा के साथ मनाया एकता दिवस, सेवा वर्ष की शुरूआत

इंटरनेशनल वैश्य फेडरेशन के संस्थापक रामदास अग्रवाल की जयंती पर आयोजन लखनऊ। इंटरनेशनल वैश्य फेडरेशन के संस्थापक रहे रामदास अग्रवाल की जयंती वैश्य एकता दिवस...

सुभागी में दिखी स्त्री के आत्मसम्मान की कहानी

15 दिवसीय संस्कृत प्रशिक्षण नाट्य कार्यशाला का समापनलखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान और रंगनाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय संस्कृत प्रशिक्षण नाट्य...

सुंदरकांड पाठ के साथ कल से शुरू होगा चैती महोत्सव

तुलसी मंच पर देवताओ का आवाहन स्तुति पाठ से किया जायेगालखनऊ। श्री रामलीला समिति ऐशबाग के तुलसी सभागार में चैती महोत्सव को लेकर प्रेसवार्ता...

भातखंडे के छात्रों के लिए लगी भरतनाट्यम की क्लास

दो दिवसीय भरतनाट्यम मास्टर क्लास का समापनलखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के नृत्य विभाग द्वारा शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय भरतनाट्यम मास्टर...

भव्य पंचवेदी रुद्राभिषेक संग आकर्षण का केंद्र रहीं झांकियां

और फूलों की होली खेलीलखनऊ। मासिक शिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री शिव पार्वती बफार्नी सेवा संस्थान द्वारा मंगलवार को भव्य पंचवेदी रुद्राभिषेक आयोजित...