लखनऊ। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। जब बात ज्येष्ठ पूर्णिमा की आती है तो इसका पुण्य व महत्व दोगुना बढ़ जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करना व दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि व खुशहाली आती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट सावित्री पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा बांधकर परिक्रमा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 10 जून को सुबह 11:35 बजे प्रारंभ होगी और 11 जून को दोपहर 01:13 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि में ज्येष्ठ पूर्णिमा 11 जून को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा जिस दिन लगती है, उस दिन दोपहर में ही वट सावित्री पूर्णिमा व्रत की पूजा और कथा पढ़ी या सुनी जाती है। ऐसे में वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 10 जून 2025 को किया जाएगा।
ज्येष्ठ पूर्णिमा स्नान-दान मुहूर्त
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर स्नान-दान का ब्रह्म मुहूर्त 4:02 ए एम से 04:42 ए एम तक रहेगा। इसके बाद अमृत काल सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सत्तू, मौसमी फलों, वस्त्र, जल, अन्न व धन आदि का दान अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन दही व दूध का दान करने से चंद्रमा मजबूत होता है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार का सामान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
सनातन एकता महा सम्मेलन कल, तैयारी पूरी
लखनऊ। सनातन एकता महा सम्मेलन आगामी 11 जून को कबीर आश्रम, दसौली, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के सामने, कुर्सी रोड में प्रात: 11 बजे से आयोजित किया जा रहा है। जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है। सम्मेलन का उद्घाटन अनीत कौशिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रधानमंत्री जनकल्याण योजना जागरूकता अभियान करेंगे। इस महा सम्मेलन की जानकारी देते हुये अखण्ड आर्यावर्त आर्य त्रिदंडी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी ने दी। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में साधू संत, महात्मा, विभिन्न राजनैतिक, गैर राजनैतिक संगठनों के प्रतिनिधि सहित हजारों की संख्या में सनातनी हिस्सा ले रहें है। श्री त्रिवेदी ने बताया कि सनातन एकता महा सम्मेलन में जातिवाद से ऊपर उठकर सनातन एकता, सनातन बोर्ड के गठन, विभिन्न हिन्दूवादी संगठनों को एकजुट कर भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने पर परिचर्चा की जायेगी। श्री त्रिवेदी ने बताया कि सम्मेलन में भाग लेने के लिये देश के विभिन्न हिस्सों से लोगों का पहुंचना कल से शुरू हो जायेगा।





