वाशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक बयान में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य देशों और अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए शुरू किए गए सुरक्षा मिशन में शामिल होने के उनके प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने इस रुख पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए नाटो को एक ‘एकतरफा व्यवस्था’ करार दिया, जहां अमेरिका हर साल अरबों डॉलर खर्च कर अन्य देशों की रक्षा करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उसे सहयोग नहीं मिलता। राष्ट्रपति ने विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया का नाम लेते हुए कहा कि इन देशों ने भी मदद के आह्वान को ठुकरा दिया है, जो रणनीतिक रूप से अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
हालांकि, सहयोग न मिलने के बावजूद ट्रंप के तेवर बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता अब लगभग ‘ध्वस्त’ हो चुकी है और अमेरिका को अब किसी भी देश की सहायता की आवश्यकता नहीं है। ट्रंप के अनुसार, हालिया अमेरिकी सैन्य कार्यवाहियों में ईरान की नौसेना, वायुसेना, विमान रोधी प्रणाली और रडार व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व अब प्रभावी नहीं रहा है, जिससे वह भविष्य में अमेरिका या उसके सहयोगियों के लिए खतरा पैदा करने की स्थिति में नहीं है। गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमला शुरू किया था, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित करने का प्रयास किया। इस तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर दिया है और एक बड़े ऊर्जा संकट की आशंका पैदा कर दी है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस स्थिति पर पलटवार करते हुए कहा कि तेहरान की दृष्टि में जलडमरूमध्य पूरी तरह ‘खुला’ है, लेकिन यह प्रतिबंध केवल ईरान के दुश्मनों और उनके सहयोगियों के लिए ही लागू है। इस बीच, युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार पूरी तरह सतर्क है। भारतीय प्रयासों के चलते ‘नंदा देवी’ नामक दूसरा एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गया है, जबकि इससे पहले ‘शिवालिक’ गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंच चुका था। वर्तमान में भी लगभग 24 भारतीय पोत इस संवेदनशील क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं। भारतीय अधिकारी क्षेत्र के सभी संबंधित पक्षों के साथ निरंतर संपर्क में हैं ताकि शेष जहाजों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया दो गुटों में बंटी नजर आ रही है और समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा एक बड़ी वैश्विक चुनौती बन गई है।





