दार्शनिक बर्क ने संगठन के महत्व को बताते हुए लिखा है कि ‘जब दुष्ट गुट बना लें तब सज्जनों को भी संगठित हो जाना चाहिए, अन्यथा एक-एक कर सबकी बलि चढ़ जायेगी।’ चीन ने दुनिया भर में अपने कारोबार को फैलाकर पहले पैसा कमाया और अब पैसे और उससे अर्जित ताकत के बल पर पूरी दुनिया को धमका रहा है।
चीन जिस तरह अपने आर्थिक और सैन्य सामर्थ्य का अश्लील प्रदर्शन कर रहा है उससे दुनिया का कोई देश सुरक्षित नहीं रह गया है। अमरीका चीनी मिसाइलों की जद में है, तो पड़ोसी देश जो चीन से सीमा साझा करते हैं वे उसके विस्तारवाद से त्रस्त हैं। पूर्वी तुकिस्तान, इनर मंगोलिया, तिब्बत, हांगकांग, मकाऊ पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है और इनके 41.13 लाख वर्ग किलोमीटर जमीन को हड़प चुका है।
यह क्षेत्रफल भारत के कुल क्षेत्रफल से भी करीब सवा गुना है। चीन रूस, कनाडा के बाद तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्रफल वाला देश है, लेकिन फिर चीन की जमीन की भूख मिटने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। चीन की 22 हजार किलोमीटर लंबी सीमा चौदह देशों से लगी है और अधिकांश देशों के भूभाग पर चीन का दावा है। चीन ने 1949 के बाद लगातार दूसरे देशों पर कब्जा किया है और यही कारण है कि चीन आज लगभग एक करोड़ वर्ग किलोमीटर पर काबिज है।
इसमें से करीब आधा हिस्सा उसने दूसरे देशों एवं उनके भूभाग पर कब्जा करके हथियाया है। इसके बावजूद चीन का पेट नहीं भरता है। चीन करीब 23 देशों की जमीन एवं समुद्री क्षेत्र पर दावा करता है और दक्षिण चीन सागर से लेकर हिन्द महासागर के व्यापारिक मार्गों पर अपना हक जताता है और ताकत का प्रदर्शन कर पड़ोसी देशों को धमकाता रहता है। चीन खुद इतना शैतान देश है और ऊपर से उसने पाकिस्तान, उत्तर कोरिया जैसे दुष्ट देशों को पीछे लगा लिया है।
भारत के पड़ोसी देशों के भ्रष्ट नेताओं को उसने खरीद कर भारत के खिलाफ खड़ा कर दिया है। ऐसे मे चीन से सुरक्षा के लिए जहां भारत को अपनी ताकत लगातार बढ़ाते रहना है वहीं यह भी जरूरी है कि चीन से परेशान देशों को एकजुट कर भारत इनके साथ सामरिक, व्यापारिक, आर्थिक और वैज्ञानिक साझेदारी बढ़ाये। चीन के खिलाफ यह साझेदारी इतनी प्रबल होनी चाहिए कि जब भी चीन कोई हरकत करे तो सभी देश एक ईकाई के रूप में एकजुट होकर चीन को वाजिब जवाब दें।
ऐसी मजबूत एवं ठोस साझेदारी के जरिये ही चीन पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इस संदर्भ में अमरीका के विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने यह संकेत दिया है कि चीन की आक्रामकता पर नियंत्रण के लिए अमरीका, भारत, जापान और आस्टेÑलिया मिलकर नाटो जैसा एक मजबूत सैन्य गठजोड़ बनाने पर विचार कर रहे हैं ताकि एशिया प्रशान्त क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को कायम रखा जा सके। इसमें दक्षिण कोरिया, ताइवान जैसे देशों को शामिल करने का भी प्रयास है।
अगर अमरीका, भारत, जापान, आस्टेÑलिया, ताइवान, दक्षिण कोरिया जैसे देश चीन के खिलाफ एकजुट हो जायें तो न सिर्फ सैन्य मोर्चे पर चीन पर लगाम लगाया जा सकता है बल्कि चीन को इतना आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है जिसमें वह युद्ध के लायक ही न बचे। नाटो की तर्ज पर क्वैड बनाने का विचार चीन से सुरक्षा का प्रभावी उपाय हो सकता है। इसलिए भारत को इस दिशा में ठोस पहल कर सभी देशों को एक मंच पर लानाचाहिए।





