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बाल वर्ग में काश्वी, किशोर में विधि और युवा में मैत्री रहीं अव्वल

यूपीएसएनए की प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता के तीसरे दिन हुई कथक की प्रतिस्पधार्एं
लखनऊ । उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता का प्रथम चरण 1 से 3 दिसम्बर तक अकादमी के संत गाडगे जी आॅडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस क्रम में बुधवार 3 दिसम्बर को कथक की बाल, किशोर एवं युवा वर्ग की प्रतियोगिताएं हुईं। इस प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता का दूसरा सत्र गायन का, 8 से 11 दिसम्बर तक होगा।
कथक की प्रतियोगिताओं के बाल वर्ग में काश्वी अग्रवाल प्रथम, दिव्यांशी सिंह द्वितीय, जयंतिका मिश्रा तृतीय, किशोर वर्ग में विधि जोशी प्रथम, वान्या भगत द्वितीय, अद्विका शांडिल तृतीय, युवा वर्ग में मैत्री जोशी प्रथम, वंदिता द्वितीय और आयुश्री तृतीय रहीं। इस प्रतियोगिता के उद्घाटन सत्र में अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह एवं निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर सहित आमंत्रित निर्णायक, जबलपुर की मोहिनी मोघे, भोपाल की विजया शर्मा और दिल्ली की शाम्भवी शुक्ला ने संयुक्त रूप से मंगल दीपक प्रज्वलित किया। इसके साथ ही आमंत्रित निर्णायकों को
अंगवस्त्र देकर सम्मानित भी किया गया। रेनू श्रीवास्तव और डॉ. पवन तिवारी के संयोजन में हो रही इस प्रतियोगिता का मंच संचालन समरीन ने कुशलता के साथ किया।
बाल वर्ग में मेरठ की काश्वी अग्रवाल ने ठुमरी काहे रोकत डगर प्यारे… पर जहां सुंदर भावों का प्रदर्शन किया वहीं पारंपरिक कथक की तैयारी, उन्होंने पखावज परन और उड़ान के टुकड़े के माध्यम से दशार्यी। मेरठ की ही दिव्यांशी सिंह ने कड़ी टक्कर देते हुए झप ताल के उपरांत माता काली तू कल्याणी पर नृत्य कर अपनी प्रभावी आमद दर्ज करवायी। कानपुर की काएना ने लोकप्रिय ठुमरी काहे रोकत डगर पर सुंदर नृत्य किया। फरुर्खाबाद की नव्या गुप्ता ने नीर भरन जमुना तट पर, आगरा की अक्षधा चौहान ने ठुमरी घर जाने दे छोड़ मोरी बहिया, गाजियाबाद की शनाया श्रीवास्तव ने ठुमरी एसो हटीलो छैल, वाराणसी की वरण्या सिन्हा ने दादरा आजो कान्हा करो न मोसे रार और वाराणसी की ही जयन्तिका मिश्रा ने आड़ी लय के उपरांत नीर भरन जमुना तट पर प्रभावी भावों का प्रदर्शन कर तालियां अर्जित कीं।
किशोर वर्ग में मेरठ की देवांशी यादव ने ठुमरी कान गिरधारी मेरो मग रोकत और यशस्वी थपलियाल ने ठुमरी ए री सखी मोरे पिया घर आए पर नृत्य कर, अपनी प्रबल दावेदारी पेश की। देवांशी, साल 20-21 और यशस्वी, साल 21-22 की इसी प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता के बाल वर्ग में अव्वल स्थान अर्जित कर चुकी हैं। लखनऊ की विधि जोशी ने दुर्गा स्तुति, तीन ताल के उपरांत बनारसी दादरा कन्हैया जी यह कैसा जादू डाला पर मनोहारी भावों का प्रदर्शन किया वहीं लखनऊ के ही निखिल कसौधन ने पंचम सवारी और शिव वंदना ह्लजटा टवीह्व पर दक्षता के साथ नृत्य किया। प्रयागराज की गौरी मालवीय ने ठुमरी रोको न डगर मेरो श्याम, मुरादाबाद की वर्णिका पटेल ने भवानी दयानी, गाजियाबाद की अद्विका शांडिल ने ठुमरी सांची कहो मुझसे श्याम पर नृत्य कर इस प्रतियोगिता में प्रभावी प्रतिभाग किया वहीं वाराणसी की आदिती चटर्जी ने शिव परन के साथ ही चक्करदार परन, उठान, ठाट, आमद, लड़ी और सहारनपुर की श्वेता पाण्डेय ने गणेश वंदना, धमार आदि का प्रदर्शन किया।
युवा वर्ग में बनारस की संस्कृति शर्मा ने शिवस्तुति नागेन्द्र हराय से प्रस्तुति की शुरूआत की। इसके उपरांत उन्होंने तोड़े, टुकड़े, परन के उपरांत दादरा पेश कर प्रशंसा हासिल की वहीं बनारस की ही अन्वेषा दत्ता ने शिव भजन डिमिक डिमिक डमरू कर बाजे पर मनोरम भावों का प्रदर्शन किया।
अकादमी द्वारा वर्ष 2024-25 में सम्भागीय शास्त्रीय प्रतियोगिता का स्वर्ण जयन्ती वर्ष था, जिसमें शास्त्रीय संगीत के साथ सुगम संगीत-गजल और भजन, को भी शामिल करते हुए इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के 18 सम्भाग के 21 केन्द्रों पर लगभग 900 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया था। वर्ष 2025-26 में आयोजित सम्भागीय शास्त्रीय एवं सुगम संगीत प्रतियोगिता के 18 सम्भाग के 23 केन्द्रों में लगभग 1100 प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़ कर सक्रिय भागीदारी की। प्रतिभागियों के उत्साह को देखते हुए इस साल दो नये केन्द्र लखीमपुर और फरुर्खाबाद को जोड़ा गया है।

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