बदहाली-कंगाली के कारण दुनिया में उपहास का पात्र बन चुका पाकिस्तान कश्मीर को लेकर किस हद तक पागल है इसका अंदाजा नेताओं के बयानों से लगाया जा सकता है। भारत में धारा 370 और 35ए को प्रभाव शून्य करने के बाद पाकिस्तान बौखलाहट में पुलवामा जैसे हमले, मामले को संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाने, किसी भी हद तक जाने और युद्ध के लिए तैयार रहने जैसी धमकियां दे रहा है। पाकिस्तान की इन धमकियों में कितना दम है, यह समझने के लिए इतना की काफी है कि वह भारत से चार-पांच बार सीधा युद्ध कर चुका है और तीन दशक से छद्म युद्ध लड़ रहा है। इन युद्धों से पाकिस्तान के टुकड़े-टुकड़े हो चुके हैं, उसका नक्शा बदल चुका है, जनता बदहाल है और सेना भारत के साथ तनाव का माहौल बनाकर आर्थिक संसाधनों को लूट रही है। यह कैसा पाकिस्तान है जिस पर अनगिनत युद्ध हारने के बाद भी युद्धोन्माद छाया रहता है। यह कैसा देश है जो अपनी बर्बादी पर आंख मूंदकर ताकतवर देश के साथ हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहने की बात करता है।
दरअसल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान हों, सेना हो या दूसरे अन्य नेता। इनकी राजनीति बहुत कुछ कश्मीर के इर्द-गिर्द घूमती है। पाकिस्तानी नेता कश्मीर छीन लेने या भारत को परास्त कर देने जैसे भड़काऊ भाषणों के जरिए कट्टरपंथी जमातों का समर्थन पाते हैं और जब सत्ता में होते हैं तो वास्तविकता से मुंह चुराकर कश्मीर पर सेना और जिहादी संगठनों की गठपुतली बन जाते हैं। शायद यही कारण है कि कश्मीर पर भारत के फैसले के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री, उनके मंत्री और सेना भड़काऊ बयानबाजी करने में व्यस्त हैं। ताकि जेहादियों को संतुष्ट कर सकें कि वह कश्मीर को लेकर भारत से लड़ाई लड़ रहे हैं। इमरान खान जैसे-तैसे वायदे करके ट्रंप से यह बयान दिलाने में सफल हुए थे कि अमरीका मध्यस्थता के लिए तैयार है। हालांकि इस बयान का व्हाइट हाउस और यूएस स्टेट डिपार्टमेंट खंडन कर चुके हैं, लेकिन इमरान पाकिस्तान में इसे अपनी सफलता बताकर आंतरिक समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने की फिराक में थे।
जब भारत ने कश्मीर पर फाइलन स्टैंड ले लिया तो अब उनको ताने सुनने पड़ रहे हैं। जेहादी धिक्कार रहे हैं, जनता उपहास उड़ा रही है और विपक्ष विशेषकर उनकी नयी-नवेली प्रतिद्वंदी मरियम नवाज यह साबित करने में जुटी हैं कि ट्रंप ने इमरान को मूर्ख बनाने के लिए बयान दिया था। इन दबावों से घिरे इमरान खान पुलवामा जैसी घटना होने का बयान दे रहे हैं, अपने मंत्री से युद्ध के लिए तैयार रहने का बयान दिलवा रहे हैं, तो जनरल बाजवा कश्मीर के लिए किसी भी हद तक जाने की बात कर रहे हैं। दरअसल इन बयानों में कोई दम नहीं, लेकिन यह अस्तित्व बचाने की कोशिश जरूर है। क्योंकि कश्मीर का वास्ता देकर ही पाकिस्तानी सेना जनता को लूटती और मौज करती रही है। अब उसके दावों-वायदों की हवा निकल रही है तो बौखलाहट भरी बयानबाजी कर पाकिस्तान में मुंह छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। जहां तक युद्ध की बात है, तो पाक सेना को भारत की ताकत का अंदाजा है।





