लखनऊ। किसान मेलों और गोष्ठियों के नाम पर गबन करने के आरोप में शाहजहांपुर में दो अधिकारीयों शाहजहांपुर में तैनात प्रसार सहायक डॉ बृजराज सिंह चौहान और सहायक लेखाधिकारी बालगोविंद दीक्षित के खिलाफ मुक़दमा दर्ज कराया गया है।
प्रदेश के अपर मुख्य सचिव चीनी उद्योग एंव गन्ना विकास संजय आर भूसरेड्डी ने मंगलवार को बताया कि उत्तर प्रदेष गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर मे किसान मेले और किसान गोष्ठी के आयोजन के नाम पर 41.52 लाख रुपये के गबन का प्रकरण प्रकाश मे आया था, जिसे प्रारंभिक जांच मे सही पाया गया। उन्होंने कहा कि गबन के प्रकरण में बृजराज सिंह चौहान और बालगोविन्द दीक्षित गन्ना शोध परिषद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी हैं।
भूसरेड्डी ने बताया कि दोनो अधिकारियों द्वारा मिली भगत कर साल 2012-13 में अलग-अलग जिलों में गोष्ठियों एवं किसान मेलों का फर्जी आयोजन दिखाकर मैसर्स प्रखर इन्टरप्राईजेज शाहजहांपुर और हर्षित स्वीटस के नाम से फर्जी वाउचर्स तैयार कर गबन किया गया है।
जांच में पाया गया कि जिन किसान मेलों व गोष्ठियों का आयोजन चौहान ने दर्शाया है, वह सभी फर्जी है। इस तरह मेले गोष्ठियों के नाम पर सरकारी धन को हड़पने की नियत से फर्जी बिल लगाकर उसका नकद भुगतान दिखाया गया। इस काम मे सहायक लेखाधिकारी गन्ना शोध परिषद बालगोविंद दीक्षित और चौहान की मिलीभगत पायी गयी है।
गन्ना विकास आयुक्त ने यह भी बताया कि दोनो अधिकारियों द्वारा वित्तीय नियमों के विरूद्ध किसान मेले के आयोजन के लिए 1,46,473 रुपये और अलग-अलग जिलों मे 120 गोष्ठियों के आयोजन के लिए 34,22,750 रुपये नकद निकले गये। हर्षित स्वीट्स के पक्ष मे 5,82,900 रुपये के 23 फर्जी बाउचर तैयार कर कुल 41.52 लाख का संयुक्त रूप से गबन कर लिया गया।
यह तब हुआ जब वित्त विभाग द्वारा जारी शासनादेशों के अनुसार 5000 रुपये से ज़्यादा धनराशि का भुगतान विशेष परिस्थतियों मे इस शर्त के अधीन किया जा सकता है कि वास्तविक प्राप्त कर्ता को सही भुगतान किये जाने का पूरी ज़िम्मेदारी आहरण एंव वितरण अधिकारी की होगी।
भूसरेड्डी ने बताया कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी जायेगी और प्रदेश मे गन्ना विभाग या इसकी सह संस्थाओं का कोई भी कर्मचारी या अधिकारी विभागीय नियमों एवं निर्देषों के विपरीत कार्य किये जाने का दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।





