लखनऊ। 16 अगस्त शनिवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पर्व है। कान्हा के जन्म के इस उत्सव को मनाने के लिए हर कोई लालायित है। घरों में इसकी तैयारी जोरों पर चल रही हैं। महिलाओं ने अभी से झांकी एवं अन्य पकवान बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। दुकानों पर भी जन्माष्टमी का रंग छाने लगा है। शहर के प्रमुख दुकानों पर जन्माष्टमी पर्व की तैयारियां जोरों पर चल रही है।
वहीं अमीनाबाद, आलमबाग, चौक, भूतनाथ मार्केट में लड्डू गोपाल के साथ विभिन्न लीलाओं की मूर्तियों के लिए खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। साथ ही ठाकुर जी के झूलों, सिंहासनों, ज्वेलरी व पोशाकों से सज गया है। सराफा बाजार में भी सोने-चांदी के गोपाल, बांसुरी की बिक्री बढ़ गई है। माखन चोर के साथ विभिन्न लीलाओं की इन मूर्तियों के लिए खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। कान्हा के जन्म का उत्सव घर-घर में मनाया जाता है। कई घरों में भी बच्चों द्वारा जन्माष्टमी सजाई जाती है। इसके लिए बच्चों ने खिलौने निकालने शुरू कर दिए है। वहीं कई बच्चों ने जन्माष्टमी सजाने के लिए अभी से बुरादा एकत्र करना कर उसे रंगना शुरू कर दिया है।
पंच धातु के लड्डू गोपाल:
पालने में बैठे नन्हें लड्डू गोपाल, बगल में बैठी सुंदर सी राधा रानी के साथ अब अष्टधातु, पंच धातु में भी मिल रहे हैं। गोर वर्ण, पीतांबरी वर्ण के अलावा श्याम सुंदर, सांवली सूरत और नील वर्ण ठाकुर जी भी भक्तों से सेवा करा रहे हैं। इनका पूरा शृंगार भी दुकानों पर है।
ऐसी हैं कन्हैया की मूर्तियां:
भगवान श्रीकृष्ण रंग बिरंगे वस्त्रों में सजे हैं। जहां पीतल के लड्डू गोपाल सुंदर वस्त्रों में सजकर पालने में झूल रहे हैं। वहीं मनमोहक बांसुरी बजाते कन्हैया भक्तों को रिझाते नजर आ रहे हैं। बाजार में उपलब्ध भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियां लखनऊ व वाराणसी सहित मथुरा व मुंबई में तैयार की गई हैं।
कृष्ण की मूर्तियों में बड़ी वैरायटी:
इस बार बाजार में भगवान कृष्ण की मूर्तियों में बहुत वैरायटी आयी है। बांसुरी बजाते, पालना में बैठे, माखन खाते कान्हा की प्रतिमा, बालरूप में बांसुरी की तान वाली मुद्रा, मोरपंख धारण किए, नींद में सोते मुद्रा वाली मूर्तियों को श्रद्धालु ज्यादा पसंद कर रहे हैं। जिनकी कीमत 100 रुपए से लेकर 1000 रुपये तक है।
कान्हा की झांकियों से सजा बाजार :
ग्राहकों द्वारा झांकी सजाने के लिए भी सजावटी वस्तुएं खरीदी जा रही हैं, इसमें झूले, बेड के साथ मच्छरदानी, पंखे आदि सजावटी सामान हैं, जिनको ग्राहकों द्वारा खूब पंसद किया जा रहा है। मंदिर को सजाने के साथ-साथ होने वाले कार्यक्रम को लेकर भी मंदिर से जुड़े लोग तैयारियों में जुटे हैं। कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर भक्तों में उत्साह का माहौल हैं। इस बार कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारियां मंदिरों के अलावा कालोनी और शहर में जगह.जगह की जा रही हैं। कहीं रुई की झांकी की तैयारी हो रही है, तो कहीं नाव की झांकी सजेगी। यहां तक कि इस बार कई जगह मटकी फोड़ प्रतियोगिता भी होगी।
कान्हा के लिए चांदी की बांसुरी, मुकुट की काफी ज्यादा डिमांड
जन्माष्टमी के अवसर पर काशी में बाजार गुलजार हो गये हैं। एक ओर जहां माला फूल पूजन सामग्री कि दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है, वहीं दुकानों पर जन्माष्टमी से जुड़े खिलौने, कपड़े, मुकुट, पेंटिंग आदि की डिमांड है। इसके अलावा पीतल, प्लास्टिक, मिट्टी आदि से बने आकर्षण खिलौने जैसे झूले, पालना व सजावट में काम आने वाले झालर बिजली बत्ती की भी मांग तेज है। बाजार में हरे-हरे अशोक के पत्ती, प्लास्टिक के फूल, कदंब के पेड़, करौंदे का पेड़, झावा बुरादा आदि चीजों से बाजार सज गए हैं। सोमवार की सुबह से ही खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है। जिससे पूरा बाजार कृष्णमय हो गया है। बाजार में काफी रौनक देखने को मिल रही है। शहर के लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की खरीदारी करने को उमड़ पड़े हैं। इन सभी के अलावा भगवान के लिए चांदी के मुकुट, बांसुरी, लड्डू गोपाल कि चांदी कि मूर्ति कि भी डिमांड है। गोपाल दास सर्राफ के अधिष्ठाता अजय कुमार शर्मा ने बताया की इस बार जन्माष्टमी के अवसर पर कई नए डिजाईन कि चीजें आई हैं। इनमें भगवान का मुकुट, बांसुरी, मूर्ति विशेष कारीगरों द्वारा बनवाया गया है। जन्माष्टमी पर महंगाई का कोई असर नहीं नजर आ रहा है।
राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है मोरपंख:
जन्माष्टमी के खास मौके पर हर घरों में तैयारियां चल रही है। खूब पकवान बनाए जा रहे हैं और कृष्ण के पालकी से लेकर मंदिर को फूलों से सजाया जा रहा है। लड्डू गोपाल के जन्म के बाद गोपाल को स्न्नान करा के नन्हें नंद के लाला का श्रृंगार किया जाता हैं। नन्हे बाल गोपाल की सजावट में कोई कमी ना रह जाए। इसके लिए ये बेहद जरूरी है कि कान्हा के जन्मोत्सव पर उनका श्रृंगार उनकी प्रिय और शुभ चीजों से कैसे किया जाए। इसके लिए हम आपको बताएंगे की इस खास मौके पर कैसे शुभ चीजों से बाल गोपाल का करें श्रृंगार। मोरपंख के बिन कृष्ण की कल्पना नहीं की जा सकती। मान्यता है कि मोरपंख राधा.कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है इसलिए कान्हा हमेशा इसे अपने सिर पर सजाते हैं। उनके मुकुट में मोरपंख सदैव लगा होता है। श्रीकृष्ण के मुकुट की सजावट मोर पंख के बिना अधूरी है।
पीले वस्त्र पहनायें:
जन्माष्टमी पर कान्हा के आगमन पर उनका अभिषेक कर पीले वस्त्र पहनाएं। रंग बिरंगे वस्त्रों से कान्हा प्रसन्न होते हैं। पीले रंग के वस्त्र कृष्ण को बेहद प्रिय है।
वैजयंती माला उन्हें जरूर पहनाएं:
जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के श्रृंगार में कान के कुंडल बाजूबंध, कमरबंध, हाथ के कड़े, पायल के साथ वैजयंती माला उन्हें जरूर पहनाएं। ये माला वैजयंती के वृक्ष के बीजों से बनती है। कहते हैं वैजयंती माला राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम की निशानी है। कान्हा की पूजा में वैजयंती के फूल बहुत शुभ माने जाते हैं।
सुगंधित चंदन की खुशबू बाल गोपाल को बहुत पसंद:
सुगंधित चंदन की खुशबू बाल गोपाल को बहुत पसंद है। चंदन विभिन्न प्रकार के होते हैं। सफेद चंदन, हरि चंदन, गोमती चंदन आदि कान्हा का गोपी चंदन से श्रृंगार उत्तम माना जाता है।
छोटी सी बांसुरी कान्हा के हाथ में जरूर रखें:
बांसुरी के बिना कान्हा अधूरे माने जाते हैं। श्रीकृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर राधा रानी, गोपियां, ग्वालें, मंत्रमुग्ध हो जाती थी। मान्यता है कि मुरली में कृष्ण का वास होता है। जन्माष्टमी पर चांदी या कोई भी छोटी सी बांसुरी कान्हा के हाथ में जरूर रखें।
नजरदोष से बचाने के लिए काजल जरूर लगाएं:
कान्हा की छवि इतनी मनमोहक कि उन्हें नजरदोष से बचाने के लिए काजल जरूर लगाया जाता है। माता यशोदा सदैव कान्हा के श्रृंगार के बाद उन्हें छोटा सा काजल का टीका लगाती थीं।
लड्डू गोपाल के खिलौने वाले आइटमों की ज्यादा मांग
लखनऊ। जन्माष्टमी पर ठाकुरजी की झांकी सजाने के लिए भक्तों में खिलौनों की बहुत मांग है। लड्डू गोपाल के लिए मैक्रम का लटकाने वाला झूला, लकड़ी का झूला, पोशाकें, मुरली, घुंघुराले बाल, शीशा, जूतियां, पालना लाइटिंग गुब्बारे, सिंहासन, चारपाई, सिंहासन, माइकल जैक्सन टॉपी, नग से सजा चश्मा, माखन मटकी, लाइट झालर, कालिया नाग व अन्य खिलौने हैं। वहीं कई लोग लड्डू गोपाल के लिए चांदी के खिलौने भी तैयार करवा रहे हैं।
तरह-तरह की नई पोशाक:
पिछले काफी समय से मंदी के दौर से गुजर रहा मुकुट पोशाक के कारोबार से जुडे़ लोगों को श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व से खासी उम्मीदें हैं। यही कारण है कि बाजार में इन दिनों नई डिजाइन की पोशाकें पहुंच गईं हैं। सुंदर और सजीली पोशाकों को श्रृद्धालु खरीद भी रहे हैं। दुकानदार दीपक गोयल ने बताया कि पिछले साल कोरोना के कारण श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर बाजार में मंदी छाई रही, लेकिन इस साल बाजार को उम्मीदें हैं।
डिजायनर झूलों की धूम:
इस बार बाजार में श्रीकृष्ण भगवान के झूलों व पोशाकों की खूब खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में इस बार राधा कृष्ण की तरह-तरह की ड्रेस आयी हैं, जिन्हें लोग बड़ी संख्या में खरीद रहे हैं। दुकानदार विजय ने बताया कि इस बार सबसे ज्यादा डिमांड डिजायनर झूलों की है। इस बार झूलों में बहुत ज्यादा वैरायटी आयी है। ग्राहक राधा कृष्ण की पोशाकों के साथ-साथ अपने बच्चों को भी राधा-कृष्ण के रूप में सजाते हैं जिसके लिए हमने बड़े साइज के भी कपड़े बनवा रखें। लोग उन्हें भी बड़ी संख्या में खरीद रहे हैं।





