छावनी परिषद लखनऊ द्वारा हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित ”साहित्य समागम” के अंतर्गत नामचीन कथाकार दीर्घ नारायण के प्रथम उपन्यास ”रामघाट में कोरोना” उपन्यास में युवा चिंतन की दिशा विषय पर विशद विमर्श संपन्न हुआ। यह उपन्यास किताबघर प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित है, इसका विमोचन 2 मार्च, 2023 को विश्व पुस्तक मेला में प्रगति मैदान के लेखक मंच से हुआ था।
छावनी परिषद साहित्य समागम में लखनऊ के सभी प्रतिष्ठित साहित्यकार यथा श्री वीरेंद्र यादव, श्री शिवमूर्ति, श्री अखिलेश, श्री शैलेंद्र सागर, श्री सुभाष कुशवाहा, श्रीमती रजनी गुप्त, श्री वीरेंद्र सारंग, श्री सुभाष कुशवाहा इस समागम में तथा पूर्णिया विश्वविद्यालय (बिहार) की प्रोफेसर श्रीमती वंदना भारती ने परिचर्चा में हिस्सा लिया। स्वागत वक्तव्य का आरम्भ करते हुए छावनी इंटर कॉलेज के सेवा निवृत्त प्राचार्य श्री के डी तिवारी ने कहा इस उपन्यास के माध्यम से उपन्यासकार ने कोरोना कालखंड में भारतीय जनजीवन को बिल्कुल जीवंत रूप में सामने लाया है और सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक जीवन की विद्रूप स्थितियों को सामने लाया है।
अपने वक्तव्य में वीरेंद्र यादव जी ने कहा इस बृहद उपन्यास में कोरोना कालखंड के सभी घटनाओं को एक मनोरंजन कथानक के रूप में सामने लाया है और इसे पढ़ते हुए पाठक फिर से उसे वक्त की त्रासदियों को मन की आंखों में चलचित्र सा महसूस करते हैं। इस उपन्यास में यथार्थ के रास्ते कथावस्तु की रचना की गई है जो कि उपन्यास विधा में एक नया पैटर्न है। आगे उसने कहा जिस प्रकार यशपाल के कालजयी उपन्यास झूठा सच में देश विभाजन की त्रासदी अंकित है, उसी तरह रामघाट में कोरोना उपन्यास में कोरोना कालखंड सजीव हो उठा है और जब जब कोरोना की चर्चा होगी यह उपन्यास एक विश्वसनीय साहित्यिक दस्तावेज के रूप में धरोहर के रूप में सामने रहेगा। उपन्यासकार ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत किए हैं जो कि लेखकीय ईमानदारी का परिचायक है और यह अपने आप में बहुत बड़ी बड़ा लेखकीय साहस है।
श्री शिव मूर्ति जी ने अपने व्याख्यान में कहा कि उपन्यासकार बहुत ही तटस्थता के साथ सारी घटनाओं को एक मनोरंजक कथानक के रूप में सामने लाया है। उन्होंने इस बात की ओर संकेत किया कि कोरोना कालखंड में आर्थिक मोर्चे पर अवसरवादियों ने कोरोना को एक अवसर के रूप में लिया और महत्तम लाभ के सिद्धांत पर चलते हुए अनैतिक धनोपाजर्न किया। उपन्यासकार ने अपने लेखन में कहीं कोई समझौता नहीं किया है। श्री अखिलेश जी ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में कहा इस उपन्यास में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक ट्रेजेडी को बहुत ही साहस और समर्थ के साथ जीवंत किया गया है।
यह उपन्यास सिर्फ ब्योराभर नहीं है बल्कि कलात्मकता और सृजनात्मकता के पैमाने पर एक बेजोड़ रचना बन पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस उपन्यास में विचारधारा प्रच्छन्न अवस्था में है जो इस उपन्यास को उत्कृष्ट बनता है और उपन्यास में कोरोना कैबिनेट का गठन अपने आप में एक बेजोड़ आईडिया है।
श्रीमती रजनी गुप्त नेअपने वक्तव्य में कहा कि कोरोना कैबिनेट के माध्यम से उपन्यासकार ने वैश्विक मुद्दे को उठाया है जो हमारे युवा सोच को इंगित करता है। श्री शैलेंद्र सागर जी ने इस कहा कि इस उपन्यास में पठनीयता है और इसे व्यापक रूप से पढ़ा जाना चाहिए। श्री वीरेंद्र सारंग जी ने कहा इस उपन्यास के माध्यम से कोरोना कालखंड के विविध पक्षों को बहुत ही सरल सहज परंतु जीवंत ढंग से सामने लाया गया है।
श्री सुभाष कुशवाहा जी ने कहा कि इस उपन्यास में प्रेम कथा भी हैं लेकिन यह उपन्यास प्रेम कथा से आगे सभी समग्र पहलुओं को सजीवता के साथ प्रकट करता है। श्रीमती वंदना भारती ने अपने वक्तव्य में कहा कि वही उपन्यास सफल माना जाता है जिसमें अनकही बातें अपने आप प्रकट हो उठती है और इस रूप में यह एक सफल उपन्यास है क्योंकि उपन्यासकार ने बहुत ज्यादा शब्दों का प्रयोग किए बिना कई बड़े संकेत कर गए हैं। उपन्यास की सामाजिकता पर तो वह अभिभूत हो उठी।
लेखककीय वक्तव्य में उपन्यासकार डॉ दीर्घ नारायण ने कहा कि उपन्यास का लेखन उसने लॉकडाउन आरंभ होने की रात 25 मार्च 2020 से किया था और दो वर्षों के अनवरत लेखन की परिणति है 832 पृष्ठ का यह उपन्यास। यह सिर्फ कोरोना कालखंड की घटनाओं का एक समायोजन ही नहीं है बल्कि भारतीय जनजीवन के विविध पक्षों का एक महासम्मेलन है जो कि दशकों की समग्रता को प्रकट करता है।
कोरोना कैबिनेट एक सोच है, इस कैबिनेट में भारत को नाटो में सम्मिलित करने की बात हो या तिब्बत को पूर्ण आजादी का घोषणा, चीन को मानव सभ्यता का दुश्मन घोषित करने की बात हो या फिर उनसे कोरोना से विश्व को हुई क्षति का हजार्ना वसूली की बात हो या फिर भारतीय राजनीतिक प्रणाली में एक बड़े बदलाव की बात हो यह सभी विजन देश के युवा के विजन है। अंत में उन्होंने कहा कि यह उपन्यास वस्तुत: जीवन का उपन्यास है और आशावादी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा है। अंत में छावनी इंटर कॉलेज की प्राचार्य श्रीमती वंदना कुमारी ने सभी मूर्धन्य साहित्यकारों एवं समागम में सम्मिलित सभी श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया।
द्वारा श्री अभिनव गुप्ता छावनी हिंदी अनुभाग, श्री मनीष पटेल छावनी निरीक्षक, श्री जैनेंद्र आशलिपिक, छावनी परिषद





