लखनऊ। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी ने सोमवार को कहा है कि आज भारत के इतिहास का भारत-नेपाल संबंधों का दुर्भाग्यपूर्ण दिन है। देश के तीन हिस्सों लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल असंवैधानिक और गलत तरीके से अपना भाग बता रहा है, जबकि ये भारत का अभिन्न अंग है।
उन्होंने कहा कि नेपाल यहीं नहीं रुका, उसने अपने पार्लियामेण्ट में इसे ‘दोबारा’ संविधान संशोधन के रूप में प्रस्तुत भी कर दिया है। ये भारत के संविधान सम्मत सार्वभौमिकता और अभिन्नता को चुनौती देने जैसा है । ये किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
तिवारी ने कहा है कि नेपाल में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह अपने दम पर भारत को चुनौती देने का दुस्ससाहस करने की जुर्रत करता, इसे दूर तक पढ़ने और समझने की जरूरत है। इसमें कोई शक नहीं है कि भाषा नेपाल की ज़रूर है, लेकिन निर्देशन ‘चीन’ का हो, इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि केन्द्र सरकार भारत की एकता और अखण्डता के लिये जो भी कदम उठायेगी, उस कदम का हमारा भरपूर समर्थन रहेगा। लेकिन अब समय आ गया है कि मोदी सरकार अपनी विदेश नीति और पड़ोसी देशों से संबंध पर पुनर्विचार करे। क्या कारण है कि नेपाल, जो भारत के छोटे भाई की तरह है, और उससे लगी हुई लगभग 1700 किमी. की खुली सीमा है,जहां उत्तर प्रदेश का एक बहुत बड़ा भूभाग नेपाल की सीमा बनाता है, उस अंचल में ऐसा दुस्साहस किया जा रहा है।
तिवारी ने कहा है कि यह सोचने का समय है और गंभीर कूटनीतिक कदम उठाने की ज़रुरत है कि जिस नेपाल की निर्भरता भारत की थी उस पर चीन की न बनने पाये। अगर नेपाली कांग्रेस भी इसका समर्थन कर रही है तो यह गम्भीरतापूर्वक सोचने का समय है और बुद्धिमत्तापूर्ण कूटनीतिक कदम उठाने की जरूरत है। देश का हर नागरिक दृृढ़ता के साथ भारत की सम्प्रभुता तथा एकता और अखण्डता के लिये साथ खड़ा रहेगा।
कांग्रेस नेता ने कहा है कि भारत के भूभाग को नेपाल का अंग बताना भारत के लिये खुली चुनौती है, जिसे भारत कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। 395 वर्ग किलोमीटर का यह भूभाग देश के लिये सामरिक महत्व का हे, अत्यंत संवेदनषील है और बहुत ही महत्तवपूर्ण है क्योंकि ये भारत- नेपाल की सीमा पर तो है किन्तु चीन से जुड़ा हुआ है।





