वरिष्ठ संवाददाता
लखनऊ। ब्रेन डेड मरीज कई लोगों का जीवनदान दे सकते हैं। उनके अंगदान से गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को नई जिन्दगी मिल सकती है। यह कहना है केजीएमयू कुलपति डॉ. बिपिन पुरी का।
वह गुरुवार को केजीएमयू में अंगदान जागरुकता दिवस पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने कहा कि ब्रेन डेड मरीजों को बचा पाना कठिन होता है। ऐसे में परिवारीजन ब्रेड डेड मरीज के अंगदान कर सकते हैं। इसमें आंख, दिल, गुर्दा, लिवर समेत अन्य अंगदान किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गुर्दा की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। गुर्दा न मिलने से तमाम मरीजों को बार-बार डायलिसिस करानी पड़ती है।
लिवर के मरीजों को भी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। अंगदान से इस समस्या का काफी हद तक हल निकल सकता है। गेस्ट्रो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत चन्द्रा ने कहाकि सड़क हादसे में बड़ी संख्या में लोग घायल होकर ट्रॉमा सेंटर लाए जा रहे हैं। जांच के बाद डॉक्टरों की टीम कुछ मरीजों को ब्रेन डेड घोषित करती है। ब्रेन डेड मरीज के परिवारीजन अंगदान की प्रक्रिया पूरी करा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान अंगदान पंजीकरण शिविर लगाया गया। डॉ. अभिजीत चन्द्रा ने बताया कि 200 लोगों ने अंगदान के लिए पंजीकरण कराया है।





