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सांस के 70 फीसदी मरीजों की हड्डियां कमजोर

केजीएमयू में लगाया गया बोन मिनिरल डेनसिटी कैम्प

वरिष्ठ संवाददाता लखनऊ। उम्र बढ़ने के साथ सांस रोगियों की हड्डियां भी कमजोर हो जाती है। ऐसे में जो कई सालों से सांस के रोगी है और उम्र भी 40 के ऊपर है उन्हें अपनी हड्डियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यह जानकारी केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकांत ने दी। उन्होंने बताया कि जांच में सांस के रोगियों में लगभग 70 प्रतिशत लोगों की बोन मिनिरल डेनसिटी (बीएमडी) कम पायी गयी। वह मंगलवार को विश्व फिजियोथेरेपी जागरूकता माह के तहत केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में श्वसन पुनर्वास एवं बोन मिनिरल डेनसिटी के लिए जागरूकता शिविर को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर उन्होंने बताया कि सांस के रोगियो की अक्सर दौड़ने पर, भागने पर, सीड़ी चढ़ने पर और तेज चलने पर सांस फूलती है इसलिए वह चलने से बचते है, उम्र के साथ उनकी हड्डियां भी कमजोर हो जाती है। ऐसे सांस के रोगी जो कई सालों से सांस के रोगी है और उम्र भी 40 के ऊपर है ऐसे रोगियों का अपनी हड्डियों की क्षमता (बोन मिनिरल डेनसिटी) की जांच जरूर करवानी चाहिए।

केजीएमयू में लगे शिविर में 60 मरीजों की बोन मिनिरल डेनसिटी की निःशुल्क जांच की गयी। उन्होंने ने बताया कि सांस के मरीज हड्डियों की क्षमता को बढ़ाने के लिए धूप में जरूर बैठें और चलते रहें, वाकिंग इज दी बेस्ट एक्सरसाइज, और अपनी रक्त में कैल्शियम, विटामिन डी की जांच बीच-बीच में अवश्य कराते रहें। इसके साथ जिन लोगो को हड्डियों में या शरीर में दर्द रहता है उन लोगों को बोन मिनिरल डेनसिटी तथा रक्त में कैल्शियम, विटामिन डी की जांच अवश्य करवानी चाहिए। जिनकी सांस कई वर्षों से फूल रही हो उन्हें भी साल भर में एक बार बोन मिनिरल डेनसिटी की जांच अवश्य करानी चाहिए और अगर यह कम पायी जाती है तो अपने चिकित्सक से सलाह लें और इसका उचित इलाज करें।

इस मौके पर श्वसन पुर्नवास के लिए कार्डियो रेस्पिरेटरी फिजियोथेरेपिस्ट डा शिवम श्रीवास्तव ने श्वसन पुर्नवास फिजियोथेरेपी की सलाह दी। सोशल वर्कर जिज्ञासा सिंह ने सभी मरीजो की काउसलिंग की साथ ही डाइटिशियन दिव्यानी गुप्ता ने डाइट की सलाह दी। डा अंकित कुमार ने बताया कि श्वसन पुर्नवास पर आने वाले समस्त सांस के रोगियों का विशेष ख्याल रखा जाता है और हमेशा जानकारी ली जाती है कि उनकी हड्डियां कमजोर है कि नहीं, इसी आधार पर उन सभी को चिकित्सकीय सलाह दी जाती है।

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