लखनऊ। बांदा जेल में तैनात जेल अधीक्षक विक्रम सिंह यादव को कर्तव्य पालन में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई गौतमबुद्ध नगर की CJM कोर्ट द्वारा गैंगस्टर रवि काना की विवादास्पद रिहाई पर जताई गई सख्त नाराजगी के बाद की गई है। दरअसल, कोर्ट ने 29 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रवि काना की 2 फरवरी 2026 तक रिमांड मंजूर की थी, लेकिन जेल प्रशासन ने पुलिस सुरक्षा उपलब्ध न होने का तर्क देते हुए उसे शाम 6:39 बजे रिहा कर दिया। हैरानी की बात यह है कि रिमांड और वारंट की आधिकारिक सूचना ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए इसके महज तीन मिनट बाद यानी 6:42 बजे जेल तक पहुंच गई थी। कोर्ट ने जेल अधीक्षक के इस कदम को आदेशों की अवहेलना मानते हुए न केवल स्पष्टीकरण मांगा, बल्कि आरोपी को दोबारा गिरफ्तार करने के आदेश भी जारी कर दिए।
जेल महानिदेशक (DG) पीसी मीना ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल अधीक्षक की इस चूक को अक्षम्य माना और उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम-7 के तहत कार्रवाई के आदेश दिए। निलंबन अवधि के दौरान विक्रम सिंह यादव को केवल जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा और उन्हें विभागीय जांच का सामना करना पड़ेगा। जांच में यह स्पष्ट किया गया है कि बिना पर्याप्त आधार के इतने गंभीर अपराधी को छोड़ना जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। इस घटना के बाद बांदा जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है और लखनऊ मुख्यालय स्तर पर कारागार की सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।





