गर्मी से जानवरों को बचाने के लिए चिड़ियाघर में स्प्रिंकलर और कूलर
लखनऊ। राजधानी में झुलसाती गर्मी में लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है। लोग गर्मी से बचने के लिए ठंडे पेय, कूलर व एसी का सहारा ले रहे हैं। वहीं, शहर के चिड़िया घर में भी वन्य जीवों को गर्मी से बचाने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं।
हिरन के बाड़े में स्प्रिंकलर लगाए गए हैं तो सांप के चैंबर को ठंडा रखने के लिए कूलर का इंतजाम किया गया है।
अप्रैल में इन दिनों मई जून वाली गर्मी का अहसास हो रहा है। गर्मी के चलते सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि जानवर भी परेशान है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में चिड़ियाघर में जानवरों के लिए जू प्रशासन ने विशेष इंतजाम किये हैं। लखनऊ प्राणी उद्यान में जानवरों और पक्षियों के लिए वाटर कूलर और घास के पर्दे लगाए हैं, दिन के तापमान में अचानक वृद्धि के साथ जानवरों को हीटवेव से बचाने के लिए जू अधिकारियों ने खास बंदोबस्त किये हैं। जानवरों को गर्मी से बचाने के पानी के फुव्वारे लगाए गए हैं। तपती गर्मी से बाघ के साथ-साथ दूसरे जानवरों को राहत मिल सके इसके लिए अस्थाई तौर पर छप्पर की व्यवस्था भी कई गई है।
मौसमी फलों का आनंद ले रहे जानवर:
राजधानी में पारे के तपने के साथ इंसान ही नहीं जानवर भी परेशान है। यही वजह है कि लू और भीषण गर्मी से बचने के लिए चिड़ियाघर के जानवर पानी में अठखेलियां करने के साथ मौसमी ताजे फलों का आनंद ले रहे हैं। जानवरों को भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए बाड़ों में ताजे पानी के साथ उनके पिंजरों में कूलर व पंखे का इंतजाम किया गया है। लखनऊ की गर्मी इन दिनों पारे को लेकर नए कीर्तिमान बना रही है। शनिवार का दिन ही शुरूआती 15 दिनों के भीतर बीते 72 सालों में सबसे गर्म दर्ज किया गया है। चिड़ियाघर में जानवरों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए बाड़ों में कूलर व पंखे का इंतजाम किया गया है। साथ ही ताजे पानी की भी व्यवस्था की गई है।
हिरण के बाड़े में लगाये गये छोटे फव्वारे :
भीषण गर्मी के कारण अधिकतर जानवर अपना अधिकांश समय पानी में अठखेलियां करके ही बिता रहे हैं। वहीं, हिरण के बाड़े में लगाए गए छोटे फव्वारे जानवरों को राहत पहुंचा रहे हैं। हाथियों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए सुबह.शाम नहलाया जा रहा है। शेर, तेंदुआ व बाघ के पिंजरे में कूलर लगाए गए हैं। खुले में घूमने वाले जानवरों के लिए अस्थायी छप्पर का निर्माण किया गया है, जिससे वन्यजीवों को छाव मिल सके। साथ ही उनके पानी पीने के लिए छोटे छोटे तालाब का निर्माण किया गया है।
मौसमी फलों की दी जा रही है खुराक:
मौसम के बदलते ही जानवरों की खुराक में बदलाव किया गया है। चिड़ियाघर के एक अधिकारी के मुताबिकए मांसाहारी जानवरों को दी जाने वाली मांस की मात्रा कम कर दी गई है। साथ ही अन्य ठोस व पेय पदार्थों में बढ़ोतरी की गई है। जानवरों को तरबूज, खरबूज, ककड़ी व खीरा दिया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि मौसमी फलों के माध्यम से जानवर तरोताजा महसूस करेंगे व उन्हें गर्मी का अहसास भी कम होगा। इसलिए प्रशासन की ओर से इन फलों को खाने में शामिल किया गया है।
बाड़ों में लगे घास और टाट के परदे:
आपको बता दें कि सूरज की गर्मी शांत होने का नाम नहीं ले रही है। इस बीच लखनऊ के प्राणी उद्यान में गर्मी के प्रकोप से बचाने के लिए उद्यान प्रशासन तरह-तरह के इंतजाम कर रहा है। जानवरों को बढ़ती गर्मी और लू से बचाने के लिए चिड़ियों के बाड़ों में घास और टाट के परदे लगाए गए हैं, ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके।
सोने के लिए कूलर का इंतजाम:
वहीं उद्यान प्रशासन द्वारा बाघ को खाने में मांस की खुराक को कम कर दिया गया है। गर्मी से बचाव के लिए उसे ग्लूकोज और रसेदार फल दिये जा रहे हैं। उन्हें नाइट्रोल दिया जा रहे हैं और उनके सोने के बाड़े में कूलर का इंतजाम कर तापमान को सामान्य रखने की कोशिश की जा रही है।
टाइगर की घटाई गयी डाइट, बंदर खायेगा तरबूज
लखनऊ। तापमान बढ़ने की वजह से चिड़ियाघर में जानवरों के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं। टाइगर की डाइट जहां 12 किलो मीट थी, उसे घटाकर 10 किलो कर दी गई है। वहीं हुक्कू बंदर को उबले अंडे बंद कर तरबूज और संतरे दिए जा रहे हैं। शेर और चीते के बाड़े के हौज में पानी भी भरवा दिया गया है। चिड़ियाघर के वन्य जीव चिकित्सक ने बताया कि जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए मार्च में तैयारी कर ली जाती है। जानवरों को अंडा और गर्म तासीर वाला भोजन देना बंद कर दिया गया है। उनकी खुराक में फल और हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ा दी गई है। अप्रैल में बाड़े में कूलर और फव्वारे की व्यवस्था भी कर दी जाएगी।
खीरा-ककड़ी खाएंगे हिरण: गैंडों को दिया जाने वाला गुड़ और गन्ना बंद कर दिया गया है। अब उन्हें मूली, खीरा, लौकी और आलू दिया जाने लगा है। बाड़े में पंखे भी लगवाए गए हैं। सर्दियों में हिरणों की डाइट में पपीता, स्ट्रॉबेरी, अंजीर और अनानास शामिल था। वहीं गर्मी आते ही उन्हें खीरा, ककड़ी, चेरी दिया जा रहा है, ताकि उनके शरीर का वॉटर कंटेंट बना रहे।





