एक चूक ने देश को संकट में डाल दिया। कोरोना वायरस चीन में दो महीने से कहर बरपा रहा है। चीन में फंसे भारतीयों के साथ अन्य देशों के नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला गया।
आइसोलेशन में रखकर इलाज किया गया और इलाज व जांच के बाद स्वस्थ पाये जाने पर सकुशल घर वापसी की गयी। केरल में कोरोना के जो तीन मरीज पाये गये वे भी इलाज के बाद स्वस्थ हो गये। इस तरह भारत विशाल आबादी और आकार का होते हुए भी अपने ही पड़ोस में महामारी बन चुके कोरोना वायरस से अब तक सुरक्षित था। लेकिन निगरानी में चूक के कारण अब कोरोना का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। महज दो दिन में कोविड-19 वायरस से 28 मरीज संक्रमित पाये गये।
कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के पीछे कहीं न कहीं लापरवाही जिम्मेदार है। दरअसल पूरी तरह चीन पर ही ध्यान केन्द्रित किया गया जबकि कोरोना का पता ही तब चला है जब इससे संक्रमित मरीज दुनिया के अन्य देशों में मिलने लगे। आज कोरोना के मामले चीन में कम और उसके बाहर अधिक पाये जा रहे हैं। चीन ने पूरी सख्ती और सतर्कता के साथ कोरोना को हुबेई और उसकी राजधानी वुहान तक सीमित कर दिया है। अन्य राज्यों में कोरोना का खतरा वुहान से बहुत कम है। इसका कारण यही है कि चीन ने कठोर निगरानी और सतर्कता बरती।
कोरोना अब वैश्विक खतरा बन गया है। इसलिए जरूरी था कि कोरोना प्रभावित अन्य देशों के यात्रियों की जांच की जाती। अगर ऐसी सतर्कता बरती गयी होती तो आज बड़ा संकट देश पर नहीं आता। यह लापरवाही की इंतिहा है कि इटली में कोरोना कहर बरपा रहा है और वहां के संक्रमित नागरिक दस दिन से राजस्थान और दिल्ली में घूम-घूम कर पर्यटन कर रहे हैं। इटली से लौटा व्यवसायी पार्टी करता है और उसके संपर्क में आने वाले भी कोविड-19 से संक्रमित हो जाते हैं। इस तरह भारत में कोरोना फैलने के पीछे लापरवाही जिम्मेदार है।
फिलहाल अब सरकार की प्राथमिकता इसके प्रसार को रोकने और प्रभावितों के इलाज की होनी चाहिए तभी इस संकट से निजात मिल सकती है। कोरोना अधिक तापमान में नहीं फैलता है और इस लिहाज से देखा जाये तो प्रकृति हमारे साथ है। कोरोना से प्रभावित मामले राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मिले हैं। यहां अब हर दिन गर्मी बढ़ रही है। ऐसे में कोरोना के फैलने के लिए स्थिति अनुकूल नहीं है। जो मामले पाये गये हैं संभव है उनमें कोरोना का संक्रमण बहुत घातक स्तर का न हो, लेकिन फिर भी कोरोना वायरस देश की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी इंतजामों की परीक्षा लेगा।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर कोरोना पीड़ितों के इलाज के लिए अस्पतालों में उच्च गुणवत्ता के आइसोलेशन वार्ड बनाने, पीड़ितों को आइसोलेट कर उनका इलाज करने और पीड़ितों के संपर्क में आने वालों की निगरानी कर रहा है। यह अच्छी पहल है लेकिन इसके साथ ही सरकार को और कई उपाय करने चाहिए। कोरोना पीड़ितों के बेहतर इलाज के साथ प्रभावितों की निगरानी, संक्रमण को रोकने के लिए बाजार में सस्ते दर पर पर्याप्त सुरक्षित मास्क उपलब्ध कराने, जरूरत पड़ने पर स्कूल, सिनेमाघर, भीड़ भाड़ वाली यात्राएं, समारोह आदि पर भी रोक लगानी चाहिए और सभी संभव संसाधन एवं स्रोत से लोगों को जागरुक करना चाहिए।





