अभय सिंह निर्भीक को मिला पं. दीन दयाल उपाध्याय साहित्यिक सेवा सम्मान-2026
- शिव रात्रि पर हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
लखनऊ। पं.दीन दयाल उपाध्याय साहित्यिक सेवा संस्थान उ.प्र के तत्वावधान में आज देर शाम शिव पार्क, शिव नगर-खदरा में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। शिवरात्रि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, विशिष्ट अतिथि डॉ. नीरज बोरा उत्तरी क्षेत्र विधायक और पं. आदित्य द्विवेदी ने अम्बेडकर नगर के साहित्य मनीषी अभय सिंह निर्भीक को पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भेंट कर वर्ष 2026 के पं. दीनदयाल उपाध्याय साहित्यिक सेवा सम्मान से सम्मानित किया। डॉ सर्वेश अस्थाना के मंच संचालन में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में प्रतापगढ़ राजस्थान से पधारे कवि पार्थ नवीन ने सुनाया ” मेरे दीवाने से यदि हो गया विवाह मेरा ससुराल जा कर दीवानी बन जाउंगी, सेठजी के बेटे से विवाह यदि हुआ मेरा ससुराल जा कर सेठानी बन जाउंगी, राजाजी के बेटे से विवाह यदि हुआ मेरा ससुराल जा कर के रानी बन जाउंगी, सरकारी नौकरी वाला मिला तो खुशी खुशी ससुराल जा के नौकरानी बन जाउंगी। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए अयोध्या से आईं कवियित्री रूचि द्विवेदी ने कहा व्यर्थ का राग रागने वाले बंद आंखों से जागने वाले, अप्सराएं तुम्हे मुबारक हों हम हैं वैकुंठ त्यागने वाले। दिल्ली से आए कवि मनवीर मधुर की पंक्तियां थीं शिवजी मन तो बहुत सरल है, पर थोड़े मतवाले भी हैं, देवों के देव और कहते हैं बहुत निराले भी, अगर समझना चाहो शिव को, एक वाक्य में तो ये है, भोले, भोले को भोले हैं, पर भाले को भाले भी हैं।
श्रोताओं की जोरदार तालियों के बीच अम्बेडकर नगर के अभय सिंह निर्भीक ने सुनाया इस नापाक पड़ोसी के घर तोड़ के हम दीवार गए, पहलगाम का बदला लेने बेटे सीमा पार गए, भारत भू का नक्शा पूरा करने की तैयारी है, तीन सौ सत्तर हटा दिया अब पीओके की बारी है। निर्भीक की अन्य पंक्तियां थीं खोलकर दुनिया वालों जनता का आह्वान सुनो, टुकड़े टुकड़े गैंग के लोगों तुम भी देकर ध्यान सुनो, भारत माता का हरगिज सम्मान नहीं खोने देंगे, अपने पूज्य तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे। बिहार से आयीं कवयित्री सान्या राय ने कहा महादेव बस तुम जैसे ही उसको भी, शक्ति के सम्मुख झुक जाना आता हो। सर्वेश अस्थाना की बानगी थी राम तुम्हारे पुत्र धर्म के सामने हम खुद को लेकर शमिंर्दा हैं, पिता को वृद्धाश्रम भेज कर आज भी बेशर्मी से जिंदा हैं “। इसके पूर्व सत्येन्द्र आर्या ने अपनी सुमधुर आवाज में शिव भक्ति से ओतप्रोत भजनों की सरिता प्रवाहित की।





