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रिकॉर्ड: विदेशी मुद्रा भंडार ने पार किया 612 अरब डॉलर का आंकड़ा

नई दिल्ली। विदेशी मुद्रा भंडार देश के केंद्रीय बैंकों द्वारा रखी गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियां होती हैं। 16 जुलाई 2021 को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 83.5 करोड़ डॉलर का इजाफा हुआ और यह 612.73 अरब डॉलर पर पहुंचा। यह इसका रिकॉर्ड स्तर है। पिछले सप्ताह यह आंकड़ा 611.895 अरब डॉलर था।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा संपत्तियों (एफसीए) में हुई बढ़ोतरी की वजह से वृद्धि हुई। इस दौरान एफसीए 46.3 करोड़ डॉलर की वृद्धि के साथ 568.784 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान स्वर्ण भंडार 37.7 करोड़ डॉलर की वृद्धि के साथ 37.333 अरब डॉलर हो गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास मौजूद विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 10 लाख डॉलर बढ़कर 1.548 अरब डॉलर हो गया। आलोच्य सप्ताह में आईएमएफ के पास भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 70 लाख डॉलर घटा और यह 5.1 अरब डॉलर रह गया।

 

क्या है विदेशी मुद्रा भंडार?

विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग जरूरत पड़ने पर देनदारियों का भुगतान करने में किया जाता है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। यह आयात को समर्थन देने के लिए आर्थिक संकट की स्थिति में अर्थव्यवस्था को बहुत आवश्यक मदद उपलब्ध कराता है। इसमें आईएमएफ में विदेशी मुद्रा असेट्स, स्वर्ण भंडार और अन्य रिजर्व शामिल होते हैं, जिनमें से विदेशी मुद्रा असेट्स सोने के बाद सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं।

 

विदेशी मुद्रा भंडार के फायदे

साल 1991 में देश को पैसा जुटाने के लिए सोना गिरवी रखना पड़ा था। तब सिर्फ 40 करोड़ डॉलर के लिए भारत को 47 टन सोना इंग्लैंड के पास गिरवी रखना पड़ा था। लेकिन मौजूदा स्तर पर, भारत के पास एक वर्ष से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त मुद्रा भंडार है। यानी इससे एक साल से अधिक के आयात खर्च की पूर्ति सरलता से की जा सकती है, जो इसका सबसे बड़ा फायदा है। अच्छा विदेशी मुद्रा भंडार आरक्षित रखने वाला देश विदेशी व्यापार का अच्छा हिस्सा आकर्षित करता है और व्यापारिक साझेदारों का विश्वास अर्जित करता है। इससे वैश्विक निवेशक देश में और अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं। सरकार जरूरी सैन्य सामान की तत्काल खरीद का निर्णय भी ले सकती है क्योंकि भुगतान के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को कम करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

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