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लखनऊ के पांच कलाकारों की कृतियां अंतरराष्ट्रीय प्रिंट बिनाले में प्रदर्शित

राष्ट्रीय ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित
लखनऊ। प्रदेश की राजधानी लखनऊ सदैव से कला की एक समृद्ध और सशक्त परंपरा की वाहक रही है, जिसकी निरंतरता आज भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। जहाँ वरिष्ठ कलाकारों ने इस परंपरा को ठोस आधार प्रदान किया है, वहीं युवा कलाकार नवीन प्रयोगों और समकालीन दृष्टिकोण के साथ इसे निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। लखनऊ के कलाकार न केवल देश के विभिन्न हिस्सों में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी कला का प्रदर्शन कर पहचान और सम्मान अर्जित कर रहे हैं।
भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि इसी कड़ी में लखनऊ के पाँच कलाकारों की चयनित छापाकला (प्रिंटमेकिंग) कृतियों को कोलकाता में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है। इस संबंध में जानकारी देते हुए भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि राष्ट्रीय ललित कला अकादमी, नई दिल्ली द्वारा आयोजित तीसरी प्रिंट द्विवार्षिक (प्रिंट बिनाले) प्रदर्शनी का आयोजन इस वर्ष ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता में किया गया है। इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में भारत सहित पोलैंड, जापान, आॅस्ट्रेलिया, पुर्तगाल, लक्जमबर्ग, फ्रांस, तुर्की, श्रीलंका, इंग्लैंड, अर्जेंटीना, लिथुआनिया, कनाडा, कोरिया, ग्रीस, बुल्गारिया, स्वीडन, फिलीपींस, संयुक्त राज्य अमेरिका, कजाकिस्तान, इंडोनेशिया, मॉरीशस, चीन, मलेशिया, रूस, नेपाल, स्लोवाकिया, कोसोवो और ताइवान सहित अनेक देशों के कलाकारों की चयनित छापाकला कृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी में लखनऊ से किरण सिंह राठौर, धीरज यादव, रवि अग्रहरी, रंजू कुमारी और महेश विश्वकर्मा की कृतियों को स्थान मिलना शहर की समकालीन कला-संवेदनाओं का सशक्त प्रतिनिधित्व करता है। कलाकार धीरज यादव ने अपनी कृति के बारे में बताया कि इसमें मानवीय भावनाओं की बहुस्तरीय अभिव्यक्ति को रेखांकित किया गया है। एक मुख प्रत्यक्ष भाव को दशार्ता है, जबकि उसके साथ उभरते दो अन्य मुख उसी भावना की आंतरिक, सूक्ष्म और अंतमुर्खी परतों को उजागर करते हैं। रहस्यमयी रेखाओं से निर्मित यह रचना भावनाओं के जुड़ाव और विखंडन की प्रक्रिया को संकेतित करती है। मिस्टेरियस लाइन्स शीर्षक सेरीग्राफी और इंबोस इचिंग तकनीक में निर्मित यह कृति मानवीय अभिव्यक्तियों के भीतर प्रवाहित अदृश्य भावनात्मक धाराओं की पड़ताल करती है। रंजू कुमारी ने बताया कि वे जम्मू एवं कश्मीर से हैं। उन्होंने स्नातक की शिक्षा चित्रकला में जम्मू स्थित इंस्टीट्यूट आॅफ म्यूजिÞक एंड फाइन आर्ट्स से तथा परास्नातक शिक्षा प्रिंटमेकिंग में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से प्राप्त की है। वर्तमान में वे ललित कला अकादमी, क्षेत्रीय केंद्र, लखनऊ में प्रिंटमेकिंग कलाकार के रूप में कार्यरत हैं। उनका कला-कार्य व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों, भावनात्मक अंतरालों और स्त्री आकृति के माध्यम से संवेदनात्मक अभिव्यक्ति को केंद्र में रखता है। उनके अनुसार, कला का मूल भावनाओं में निहित होता है और प्रकृति उनकी रचनात्मक प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करती है। महेश विश्वकर्मा ने अपनी सेरीग्राफी कृति के संदर्भ में बताया कि उनकी कला-प्रक्रिया आसपास के परिवेश, सामग्री और जीवन की यथार्थ परिस्थितियों से गहरे जुड़ाव से जन्म लेती है। झारखंड के धनबाद में जन्म और पालन-पोषण ने उनकी दृष्टि को आकार दिया है। उनके लिए सामग्री केवल माध्यम नहीं, बल्कि स्मृति, श्रम और प्रतिरोध का प्रतीक है। वे उन सामग्रियों को पुन: अर्थ देते हैं जिन्हें सामान्यत: ईंधन या अपशिष्ट के रूप में देखा जाता रहा है, और उन्हें श्रमिक वर्ग के संघर्ष, गरिमा और अनुभव की अभिव्यक्ति का माध्यम बनाते हैं। इसी क्रम में रवि अग्रहरी की इचिंग माध्यम में बनी कृति ह्लसिटी आॅफ हेरिटेजह्व भी प्रदर्शित की गई है, जिसमें लखनऊ की प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया गया है। वहीं वरिष्ठ कलाकार किरण सिंह राठौर की शिवा श्रृंखला की कृति भी प्रदर्शनी का हिस्सा है। राठौर ने बताया कि उनका कार्य शिव-शक्ति की अवधारणा पर आधारित है, जो संपूर्ण ब्रह्मांड की सृजनात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। कोलकाता स्थित ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित इस तीसरी प्रिंट द्विवार्षिक प्रदर्शनी का उद्घाटन 14 जनवरी 2026 को हुआ। इस अवसर पर भारत सरकार के माननीय संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उनके साथ ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. नंद लाल ठाकुर, प्रदर्शनी आयुक्त श्री सी. एस. कृष्ण सेट्टी, संस्कृति मंत्रालय के निदेशक अनीश पी. राजन तथा सलाहकार समिति के सम्मानित सदस्य भी उपस्थित रहे। इस द्विवार्षिक प्रदर्शनी को अत्यंत सकारात्मक प्रतिसाद प्राप्त हुआ है। कुल 1,449 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं, जिनमें से 204 उत्कृष्ट कृतियों का चयन प्रदर्शनी के लिए किया गया। यह प्रदर्शनी 15 फरवरी 2026 तक कोलकाता स्थित ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र में आम जनता के अवलोकनार्थ खुली रहेगी।

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