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ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन…सुन श्रोता हुए भावविभोर

बेगम अख्तर चेयर के अंतर्गत प्रथम कार्यक्रम का भव्य आयोजन
पद्मश्री अनूप जलोटा की सुमधुर प्रस्तुति से सजा भातखण्डे का मंच
लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में भारतीय संगीत की महान परंपरा को सजीव बनाए रखने तथा देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से महान संगीत विभूतियों की स्मृति में विशेष चेयर की स्थापना की गई है। इसी क्रम में भारतीय शास्त्रीय एवं सुगम संगीत की अमर स्वर-साधिका, पद्मभूषण विदुषी बेगम अख्तर जी की स्मृति में स्थापित चेयर के अंतर्गत प्रथम कार्यक्रम का भव्य आयोजन विश्वविद्यालय के कला मंडपम सभागार में किया गया।
सर्वप्रथम भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा जी , कुमकुम धर जी एवं वरिष्ट गुरु राम मोहन महाराज के साथ विश्वविद्यालय की गायन विभागाध्यक्ष प्रो. सृष्टि माथुर, तालवाद्य विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार मिश्र एवं सहायक आचार्य नृत्य डॉ. रूचि खरे ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारम्भ किया। दीप प्रज्वलन के साथ ही सम्पूर्ण सभागार आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा। तत्पश्चात कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने पद्मश्री अनूप जलोटा जी को पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर उनका भव्य सम्मान किया ।
कार्यक्रम के आरंभ में भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के कथक नृत्य विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रुचि खरे द्वारा लिखित पुस्तक एक्यूप्रेशर और कथक नृत्य का विमोचन किया गया। इस अवसर पर डॉ. खरे ने बताया कि यह पुस्तक उनके पीएच.डी. शोध का प्रतिफल है, जिसमें कथक नृत्य को एक्यूप्रेशर एवं चिकित्सकीय अभ्यास के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक कथक नृत्य के मनोझ्रदैहिक स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डालती है तथा नृत्य को केवल एक मंचीय प्रदर्शन न मानकर, जीवन-शैली और उपचार के एक सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित करती है।
डॉ. रुचि खरे के पीएच.डी. शोध पर आधारित तथा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ की माननीय कुलपति प्रो. मंडवी सिंह की प्रेरणा, मार्गदर्शन एवं सहयोग से नृत्य विभाग आगामी शैक्षणिक सत्र से फाइब्रोमायाल्जिया रोगियों हेतु नृत्य एवं मूवमेंट थेरेपी में एक प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) कोर्स प्रारंभ करने जा रहा है।
तत्पश्चात भारतीय भक्ति संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले, पद्मश्री से सम्मानित एवं विश्वविख्यात भजन सम्राट भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र अनूप जलोटा जी ने अपनी सुमधुर, भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक संगीत प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने नें कार्यक्रम का शुभारम्भ भजन ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन से कर अनेक भजन जैसे अच्चुतम केशवं राम नारायणं,राम आएंगे, कौन कहता है भगवन आते नही, इतनी शक्ति हमें देना दाता एवं बोलो राम राम राम जैसी अनेक भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति के साथ उपस्थित छात्र छात्राओं से सामूहिक जुगलबंदी का भी प्रदर्शन किया ,उनके भावपूर्ण प्रस्तुतियों में भक्ति, श्रद्धा और संगीत की उत्कृष्टता का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह कार्यक्रम न केवल संगीत प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा, बल्कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए भारतीय संगीत की सूक्ष्मताओं, भावाभिव्यक्ति और मंचीय प्रस्तुति को निकट से समझने का एक दुर्लभ एवं प्रेरणास्पद अवसर भी सिद्ध हुआ। संचालन कार्यक्रम का भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ की पूर्व छात्रा एवं पूर्व शिक्षिका डॉ. सीमा भारद्वाज नें किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में अध्ययनरत शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय, उपशास्त्रीय एवं सुगम संगीत की समृद्ध परंपरा तथा संगीत तकनीक से परिचित कराना, महान संगीत विभूतियों की कला-साधना, जीवन मूल्यों एवं सांस्कृतिक योगदान को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करना तथा इस अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाना है। बेगम अख्तर चेयर के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा भविष्य में भारतीय संगीत एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े अनेक व्याख्यान, संगोष्ठियाँ, कार्यशालाएँ, संगीत प्रस्तुतियाँ एवं शोधपरक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे संगीत शिक्षा एवं अनुसंधान की नई संभावनाओं का विकास होगा। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ भविष्य में भी इस प्रकार के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन करता रहेगा। ये कार्यक्रम शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में जोड़ने, महान संगीत विभूतियों के योगदान को जन-जन तक पहुँचाने तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित । उन्होंने बताया कि अनूप जलोटा जी की उपस्थिति से यह कार्यक्रम ऐतिहासिक एवं प्रेरणास्पद बन गया है, जो विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय सदैव सामाजिक दायित्व एवं सामुदायिक सेवा के प्रति प्रतिबद्ध रहा है और इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से विश्वविद्यालय अपने इस संकल्प को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाएगा।

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