नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र सौंपकर तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दिया है। धनखड़ ने लिखा कि वे संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत अपने स्वास्थ्य की देखभाल और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए यह निर्णय ले रहे हैं।
धनखड़ ने अपने इस्तीफे में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के प्रति आभार जताया। उन्होंने लिखा, मैं भारत के महामहिम राष्ट्रपति को उनके अटूट समर्थन और कार्यकाल के दौरान हमारे बीच बने सुखद संबंधों के लिए अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का सहयोग और मार्गदर्शन अमूल्य रहा, उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला।

पूर्व उपराष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों के सभी माननीय सदस्यों को उनके स्नेह और विश्वास के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इस विश्वास को वे जीवन भर याद रखेंगे।
जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 2027 तक तय था। उपराष्ट्रपति के रूप में वह राज्यसभा के सभापति भी थे। उन्होंने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ही इस्तीफा दे दिया। हाल ही में उनकी एम्स, दिल्ली में एंजियोप्लास्टी हुई थी।
धनखड़ के कार्यकाल के दौरान कई बार विपक्ष से तीखे टकराव देखने को मिले। उनके खिलाफ विपक्ष ने महाभियोग का प्रस्ताव भी पेश किया था, जिसे उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया था। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार था जब किसी मौजूदा उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव लाया गया था।
धनखड़ ऐसे दूसरे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने कार्यकाल के बीच में इस्तीफा दिया। इससे पहले 1969 में वी. वी. गिरि ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद छोड़ा था।





