गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कवि सम्मेलन का आयोजन
लखनऊ। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर यूपी महोत्सव के सांस्कृतिक पंडाल, जानकीपुरम विस्तार,लखनऊ में लक्ष्य साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ आहत लखनवी की वाणी वन्दना से हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि सम्पति मिश्र भ्रमर वैसवारी एवं विशिष्ट अतिथि सुनील बाजपेयी थे अध्यक्षता कुँवर कुसुमेश ने किया। कवि सम्मेलन का कुशल संचालन कवि प्रवीण कुमार शुक्ल गोबर गणेश ने किया । कार्यक्रम का शुभारम्भ युवा कवयित्री सुश्री वंदिता पाण्डेय ने देशभक्ति पर यह कविता सुनाकर दर्शकों को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया- कर्मवीर बनिए न डरिये विप्पत्तियों से, भारतीय वीर आप वीरता दिखाइये। डॉ. निशा सिंह नवल ने देश भक्ति पर यह गीत सुनाया- जां से प्यारी है हमें अपने वतन की आबरू। दिल जिगर क्या जान भी इस पर नवल कुर्बान है पढ़कर साहित्यिक खेमे में हलचल मचा दिया। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे हास्य व्यंग कवि गोबर गणेश ने यह व्यंग सुनाया बेरोजगारी भी अब नहीं रह गई है। महंगाई भी अब खत्म हो गई है। हिंदुस्तान को सोने की चिड़िया बनने में, सिर्फ जातिवाद की समस्या रह गई सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। गीतकार सुनील बाजपेई ने बसंत पर यह कविता सुनाई। कोयल मीठी धुन गाएगी,अंग और प्रत्यंग खुलेंगे, मन का मोर करेगा नर्तन, जब बसन्त के फूल खिलेंगे। दिल्ली से पधारी गीतकार अनुजा मनु ने यह कविता सुनाकर लोगों का दिल जीत लिया। अर्पण नहीं समर्पण चाहूँ …तृषित हृदय का तर्पण चाहूँ …जिसमें देख सकूँ छवि तेरी … ऐसा जीवन दर्पण चाहूँ…गीतकार आलोक रावत, आहत लखनवी ने देश भक्ति पर यह गीत सुनाया रंग मेरा केसरिया पावन खून मेरा बलिदानी मातृभूमि हित शीश कटाते सच्चे हिंदुस्तानी जंगल में रह घास फूस का बना निवाला खाया किन्तु नहीं अकबर के आगे अपना शीश झुकाया, नोक पे जूते की रख ली थी राणा ने सुल्तानी, रंग मेरा केसरिया पावन खून मेरा बलिदानी इस अवसर पर प्रसिद्ध छंदकार डॉ.शरद पाण्डेय शशांक ने अपने धारा प्रवाह छंदो में सुनाया द्वेष का न भाव हो स्वभाव हो सभी का स्वच्छ, धन का न हो अभाव तन मन चंगा हो, रणरंगा शौर्य जन-जन में जगाता रहे, बोलें जय हिंद हर हाथ में तिरंगा हो , कवियत्री पूजा अग्रवाल ने यह मुक्तक सुनाया करूं मै प्रार्थना मन से, मुझे दर पे बुला लो तुम, धरू मै शीश भी मन से, गले मुझको लगा लो तुम, मिटा दो आप मेरे अवगुणो को श्याम ओ कान्हा, दया मुझ पे करो तुम भी, मुझे अपना बना लो तुम, कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध गजलकार कुॅवर कुसुमेश ने यह गजल सुनाई। इसके अतिरिक्त अन्य कवियों में प्रवीण पाण्डेय आवारा,सीमा श्रीवास्तव, वेअदब, लखनवी, दिनेश सोनी, आशु तिवारी, आशु सुश्री प्रिया सिंह, सुश्री अरुणिमा जोशी, राजीव पंत सौरभ सिंह, निलेश पांडे ने भी काव्यपाठ किया।





