वरिष्ठ संवाददाता लखनऊ। शहर के जनेश्वर मिश्र पार्क में सुबह अलग ही नजारा था। यहां सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं और ट्रांसजेंडर एकत्रित हो एक साथ दौड़े। मौका था, एचआईवी एड्स के प्रति लोगों को जागरूक करना।
10 किलोमीटर की यह दौड़ राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के तत्वावधान में आयोजित की गयी। मैराथन में 17 से 25 साल के छात्र-छात्राओं और ट्रांसजेंडर ने भाग लिया । रेड रन मैराथन का शुभारम्भ करते हुए प्रदेश राज्य एड्स नियन्त्रण सोसायटी के अपर परियोजना निदेशक डा. हीरा लाल ने कहा कि एक वक्त था जब कोविड से भी अधिक भयावह स्थिति एड्स को लेकर थी। समय बदला और लोगों में जागरूकता आई जिससे एड्स पर नियन्त्रण पाया गया लेकिन इसको पूरी तरह से खत्म करने के लिए अभी और जागरूकता की जरूरत है ।
आज सुबह इतनी बड़ी तादाद में आपकी उपस्थिति यह एहसास जरूर दिलाती है कि हम जल्दी ही इसमें भी कामयाब होंगे। उन्होंने कहा कि इलाज से बेहतर बचाव है, इसलिए जागरूक बनें और बीमारियों से बचें । इसके साथ ही उन्होंने जल, जंगल, जमीन के साथ ही जिन्दगी को सुरक्षित बनाने के लिए प्लास्टिक मुक्त समाज बनाने का आह्वान किया। मैराथन में पुरुष वर्ग (छात्र) के प्रथम विजेता अंकित शुक्ला रहे, जबकि दूसरे स्थान पर अमन वर्मा और तीसरे स्थान पर शिवम कुमार रहे।
महिला वर्ग (छात्रा) में पहले स्थान पर साक्षी यादव, दूसरे स्थान पर वर्षा रानी और तीसरे स्थान पर दीपिका रहीं । ट्रांसजेंडर वर्ग में पहले स्थान पर सचिन गुप्ता उर्फ खुशी, दूसरे स्थान पर हरीश और तीसरे स्थान पर मुन्ना जनानी रहे। छात्र-छात्रा वर्ग के पहले दो-दो विजेताओं को अगले महीने गोवा में होने वाले नेशनल मैराथन में भाग लेने के लिए यूपी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी ले जायेगी । इस मौके पर डॉ. हीरा लाल ने सोसायटी से कहा कि इन विजेताओं के खानपान का उचित प्रबंध किया जाए ताकि वह अच्छी तरह से अभ्यास कर नेशनल मैराथन में भाग ले सकें ।
नुक्कड़ नाटक के जरिये किया जागरूक
विविध सेवा संस्थान की नाट्य मण्डली ने आकर्षक अंदाज में एचआईवी के फैलने के प्रमुख कारणों के बारे में बताया कि एचआईवी संक्रमित खून से, एचआईवी संक्रमित सुई से, एचआईवी संक्रमित के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध से और एचआईवी संक्रमित मांं से शिशु में गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के दौरान। इससे बचने के लिए डिस्पोजल या विसंक्रमित सुई का उपयोग करें। कंडोम का सही और लगातार उपयोग करें, जांचा-परखा रक्त ही इस्तेमाल करें और एचआईवी संक्रमित गर्भवती प्रसव के दौरान उचित सावधानी रखकर शिशु को संक्रमण से बचा सकती हैं।





