उज्जैन। चैत्र नवरात्रि की पावन अष्टमी तिथि के अवसर पर गुरुवार को धर्म नगरी उज्जैन में आस्था का अनूठा समागम देखने को मिला। विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दरबार में भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ा, जहां ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित होने वाली दिव्य भस्म आरती के दर्शन के लिए देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु घंटों पहले से लंबी कतारों में डटे रहे। पूरा मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’ और ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया।
परंपरानुसार, भोर में सबसे पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया। अभिषेक की प्रक्रिया में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रसों से निर्मित पंचामृत से भगवान को स्नान कराया गया। इस दिव्य स्नान के बाद बाबा महाकाल का अलौकिक शृंगार किया गया, जिसमें उनके मस्तक पर चांदी का सुंदर त्रिपुंड, फूलों की मालाएं, बेलपत्र और चंदन का लेपन किया गया। बाबा का यह दिव्य स्वरूप देख भक्त भाव-विभोर हो उठे।
पूजा के मुख्य आकर्षण ‘भस्म आरती’ के दौरान बाबा को विशेष रूप से तैयार की गई भस्म अर्पित की गई। यह भस्म कपिला गाय के कंडों की राख और पलाश, बड़, पीपल एवं बेर की लकड़ियों के मिश्रण से तैयार की जाती है। लगभग ढाई किलो भस्म से होने वाला यह अभिषेक वैराग्य और मृत्यु के शाश्वत सत्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस आरती के माध्यम से महाकाल अपने भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। आरती के कड़े नियमों का पालन करते हुए पुरुष जहां पारंपरिक धोती में नजर आए, वहीं महिलाओं ने घूंघट कर इस आध्यात्मिक आयोजन में सहभागिता की।
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जिन्हें ‘मृत्युलोक का राजा’ कहा जाता है। अष्टमी के इस विशेष अवसर पर कपूर आरती और भोग लगाने के बाद मंदिर में दर्शन का सिलसिला निरंतर जारी रहा। हाल ही में निर्मित ‘महाकाल लोक’ कॉरिडोर की भव्यता और भस्म आरती की दिव्यता के कारण यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो उज्जैन को वैश्विक पटल पर आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बना रही है।





