लखनऊ। गुड फ्राइडे और ईस्टर ईसाई धर्म के बेहद महत्वपूर्ण पर्व माने जाते हैं। गुड फ्राइडे के ठीक दो दिन बाद ही ईस्टर मनाया जाता है। ईस्टर के दिन दुनियाभर के चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और परिवार के साथ मिलकर इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं। कई देशों में रंग-बिरंगे अंडे (ईस्टर एग), मिठाइयां और सजावट का विशेष महत्व होता है। साल 2026 में ईस्टर 5 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा, जबकि 3 अप्रैल, शुक्रवार को गुड फ्राइडे होगा। इनके बीच का दिन शनिवार, होली वीक का हिस्सा माना जाता है, जो शोक और प्रतीक्षा का समय होता है। मान्यता के अनुसार ईस्टर संडे का संबंध यीशु मसीह के पुनर्जीवन से है, इसलिए यह दिन खास आस्था और खुशी के साथ मनाया जाता है। यह दिन केवल उत्सव ही नहीं, बल्कि विश्वास, आशा और चमत्कार का प्रतीक भी है। माना जाता है कि यीशु ने मृत्यु पर विजय प्राप्त कर मानवता को यह संदेश दिया कि जीवन में हर अंधकार के बाद उजाला जरूर आता है। ईसाई मान्यताओं के अनुसार, गुड फ्राइडे के दिन यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। इसके दो दिन बाद, यानी रविवार को उनका पुनर्जन्म हुआ। इसी घटना की याद में ईस्टर संडे मनाया जाता है।
हर साल क्यों बदलती है ईस्टर की तारीख?
ईस्टर हमेशा रविवार को ही मनाया जाता है, लेकिन इसकी तारीख हर साल बदल जाती है। इसका कारण इसका निर्धारण खगोलीय गणना से जुड़ा होना है। दरअसल, यह पर्व वसंत विषुव के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा के अगले रविवार को मनाया जाता है। इसी वजह से हर साल इसकी तिथि अलग होती है। साल 2026 में वसंत ऋतु की पहली पूर्णिमा 2 अप्रैल को पड़ रही है, जिसे पास्चल मून कहा जाता है। इसलिए इसके बाद आने वाला रविवार, यानी 5 अप्रैल, ईस्टर के रूप में मनाया जाएगा।
ईस्टर संडे कैसे मनाया जाता है?
इस दिन चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और परिवार के साथ मिलकर इस दिन खुशियां बांटते हैं। कई देशों में रंग-बिरंगे अंडे (ईस्टर एग), मिठाइयां और सजावट का विशेष महत्व होता है। घरों को फूलों और मोमबत्तियों से सजाया जाता है, जो अंधकार पर प्रकाश की जीत को दशार्ता है। ईस्टर का संदेश है कि जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, उम्मीद और नई शुरूआत हमेशा संभव है।
ईस्टर पर अंडों का महत्व:
ईस्टर पर अंडों का विशेष महत्व होता है। इस दिन लोग अलग-अलग तरह से अंडों को सजाते हैं। साथ ही एक-दूसरे को अंडे गिफ्ट में भी देते हैं। इस दिन अंडे का महत्व इसलिए है, क्योंकि ईसाई धर्म के लोग अंडे को नया जीवन और उमंग का प्रतीक मानते हैं।
चर्च में होगी विशेष प्रार्थना:
इस पावन दिन पर ईसाई समुदाय के लोग चर्च जाकर प्रार्थना करते हैं और मोमबत्तियां जलाते है। इस दिन लोग एक-दूसरे को त्योहार की शुभकामनाएं देते हैं। ईस्टर की खास परंपरा है कि इस दिन अंडों को रंग-बिरंगे रूप में सजाया जाता है और उपहार के रूप में बांटा जाता है। बाइबल पाठ और आध्यात्मिक गीतों के माध्यम से इस दिन का महत्व और गहराई से महसूस किया जाता है।





