अनूप जलोटा, समीर-दीपाली, शीर्षा, समरजीत ने किया जवानों का मनोरंजन
लखनऊ। सैन्य अधिकारियों और हजारों सैनिकों के बीच पद्मश्री अनूप जलोटा और सुरभि रंजन को नौशाद सम्मान से अलंकृत किया गया। इनके साथ ही छावनी के खेल परिसर में आयोजित इस अवध मेले में शाने अवश्य सम्मान पाने वाले समीर-दीपाली, समरजीत रंधावा, शीर्षा रक्षित और बिसरूप बनर्जी के साथ लखनऊ की दीपांशी यादव ड्रमर तन्मय मुखर्जी ने अपने गीतों से शानदार महफिल सजायी। अतिथियों के तौर पर ले.जनरल अनिंद्य सेन गुप्ता जीओसी और मेजर जनरल मनीष कुकरेती ने कलाकारों को सम्मानित किया। हुनर क्रिएशन एण्ड क्राफ्ट एसोसिएशन की ओर से उत्तर प्रदेश पर्यटन और उप्र संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत अनूप जलोटा ने हजारों जवानों और उनके परिवारजनों के बीच देश को सुरक्षित रखने के लिए सभी सैनिकों का शुक्रिया अदा करते हुए- ऐसी लागी लगन… भजन से की। आगे उन्होंने- अच्युतं केशवं…, मेरी झोपडी के भाग आज खुल जाएंगे…. जैसी चन्द पंक्तियां गाते हुए बाबी फिल्म का गीत- मैं शायर तो नहीं… सुनाया। फिर जीना यहां मरना यहां… से समापन किया। हाल ही में श्रीलंका से प्रोग्राम करके लौटी समीर-दीपाली की बालीवुड जोड़ी ने- जाने जां ढूंढता फिर रहा… गाने से आगाज करते हुए जीवन के हर मोड़ पे… गीत और फिर स्क्रीन पर शम्मी कपूर का गाये- आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा…. गाने से हलचल मचायी। अंत में मैडले स्टाइल में- दम मारो दम…, सारा जमाना हसीनों का दीवाना…, लैला ओं लैला ऐसी मैं लैला… आ देखें जरा किसमें कितना है दम…. जैसे गीतों की झड़ी लगा दी। संयोजक जफर नबी व विवेक शुक्ल के संचालन में इसके बाद दीपांशी यादव ने अमिताभ बच्चन के फैंस को समर्पित करते हुए पहला गीत- इंतिहा हो गयी इंतजार की…. गाया। आगे- झूम झूम बाबा… पेशकर जवानों को झूमने पर मजबूर किया।





