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आज बच्चों के लिए साहित्य का अभाव दिखाई पड़ता है : श्रद्धा पाण्डेय

 

श्रद्धा पाण्डेय को मिलेगा सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य सम्मान

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने वर्ष 2022 के बाल साहित्य सम्मान पुरस्कार की घोषणा की

पुरस्कार स्वरूप साहित्यकार को मिलेगी 51 हजार रुपए की धनराशि

लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने वर्ष 2022 के बाल साहित्य सम्मान की घोषणा कर दी है। संस्थान की प्रधान सम्पादक डा अमिता दुबे ने बताया कि बाल साहित्य संवर्धन योजना के अन्तर्गत बाल साहित्य सम्मान दिए जाते हैं। बाल साहित्य सम्मान समिति की बैठक बुधवार को हुई। जिसमें बाल साहित्य सम्मान के लिए साहित्यकारों का चयन किया गया। जिसमें सात बाल साहित्य सम्मान के लिए साहित्यकारों की घोषणा की गई है। जिसमें गाजियाबाद के दो साहित्यकारों के साथ ही लखनऊ, बिजनौर, वाराणसी, अलीगढ़ और बस्ती के एक-एक बाल साहित्यकार का नाम शामिल है।
बाल साहित्य सम्मान 2022 के लिए सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य सम्मान गाजियाबाद की श्रद्धा पाण्डेय को दिया जाएगा। इसके साथ ही सोहन लाल द्विवेदी बाल कविता सम्मान बिजनौर के डा. अजय जनमजेय, अमृत लाल नागर बाल कथा सम्मान वाराणसी के पवन कुमार शर्मा, लल्ली प्रसाद पाण्डेय बाल साहित्य पत्रकारिता सम्मान बस्ती के लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डा. रामकुमार वर्मा बाल नाटक सम्मान अलीगढ़ के अशोक अंजुम, जगपति चतुवेर्दी बाल विज्ञान लेखन सम्मान गाजियाबाद के डा. मनीष मोहन गोरे एवं उमाकांत मालवीय युवा बाल साहित्य सम्मान लखनऊ की शताब्दी गरिमा का दिया जाएगा। सम्मान स्वरूप 51 हजार रुपये तथा सम्मान पत्र दिए जाएंगे।
सुभद्रा कुमारी चौहान बाल साहित्य सम्मान पाने वाली श्रद्धा पांडे कहती हैं कि इस सम्मान के मिलने की अपार खुशी है। मैं चयन समिति का आभार प्रकट करना चाहती हूं। साथ ही यह कहना चाहती हूं कि बाल साहित्य पर बहुत अधिक काम करने की आवश्यकता है, विशेष रूप से 8 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए क्योंकि छोटे बच्चों के लिए साहित्य उपलब्ध है परंतु 8 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए साहित्य का अभाव दिखाई पड़ता है। हम साहित्यकारों को ऐसी कहानी लिखने की आवश्यकता है जिससे बच्चे जुड़ सकें, जिसमें उनकी दुनिया हो, जो यथार्थ से जुड़ी हो, जिसके माध्यम से परोक्ष रूप से चरित्र निर्माण हो सके।

बच्चों को समर्पित है ये सम्मान : पवन कुमार वर्मा

अमृत लाल नागर बाल कथा सम्मान पाने वाले वाराणसी के पवन कुमार वर्मा कहते हैं कि मैं ये सम्मान बच्चों को समर्पित करता हूं। क्योंकि बच्चों के लिए ये सम्मान मुझे मिला है। आगे पवन कहते है कि मैं बच्चों के अभिभावकों और गुरुओं से कहना चाहता हूं कि बच्चों को बाल साहित्य से जुड़ी पुस्तकों को बच्चों को उपलब्ध कराना चाहिए, जिससे वो बाल साहित्य की बारीकियों से जुड़ सकें और बाल साहित्य को समझ सकें। आगे पवन कहते हैं कि जब तक हम बच्चों को बाल साहित्य से नहीं जोड़ेंगे तब तक बाल साहित्य का विकास नहीं हो पायेगा।

और लिखने की प्रेरणा मिलेगी : डा. अजय जनमेजय

सोहन लाल द्विवेदी बाल कविता सम्मान पाने वाले बिजनौर के डॉ. अजय जनमेजय कहते हैं कि इस सम्मान से मुझे आगे और भी लिखने की प्रेरणा मिलेगी। आगे वो कहते हैं कि आज डिजिटल का जमाना है जिस वजह से बच्चों को बाल साहित्य से जुड़ी किताबों व कविताओं से हम जोड़ नहीं पा रहे हैं। अगर हम बच्चों को इससे जोड़ेंगे तभी सही मायने में हम कामयाब हो पायेंगे। बाल कविताओं से जोड़ने के लिए बच्चों के गुरुओं व अभिभावकों को प्रयास करना होगा, तभी इस क्षेत्र में हम कामयाब हो पायेंगे। आगे डा. अजय कहते हैं कि बाल साहित्य में अभी और काम करने की जरूरत है।

 

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