घट स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र शुरू, भक्तों ने विधि-विधान से की देवी मां की आराधना, मंदिरों में लगी श्रद्धालुओं की कतार
लखनऊ। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: इन मंत्रोच्चारण के बीच शुभ मुहूर्त में आदिशक्ति मां अंबे के गुणगानों संग राजधानी में गुरुवार को मां भवानी का आवाहन घरों से लेकर मंदिरों में किया गया। इसके साथ ही नौ दिनों के इन भक्ति से ओतप्रोत पावन दिनों का शुभारंभ हुआ। नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से मां भवानी की पूजा-अर्चना की। भक्तों ने घरों में पूजा करने के बाद देवी मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचने लगे। सुबह से ही जय माता दी के जयकारों से शहर गूंजने लगा था।
नवरात्र का उल्लास में सुबह घट स्थापना के साथ ही माता के जयकारे गूंजने लगे। नवरात्र के साथ ही नल नामक नवसंवत्सर विक्रम संवत 2083 भी शुरू हो गया। बीकेटी के चंद्रिका देवी मंदिर में रात से ही भक्तों की कतार लगना शुरू हो गई थी। चौक स्थित बड़ी काली जी मंदिर, छोटी काली जी मंदिर में भी माता के भक्तों की भीड़ रही। मेहंदीगंज स्थित शीतला देवी मंदिर और बीकेटी के 51 शक्ति पीठ तीर्थ में भी माता के दर्शन पूजन के लिए बड़ी संख्या में भक्त उमड़े।
काली जी के मंदिर में फूलों से सजा दरबार :
चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर में मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना बड़े श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुई। इस अवसर पर सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और भक्तों ने माता रानी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। नवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर में विधिवत कलश स्थापना की गई तथा पूरे मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया। भक्तों ने मां शैलपुत्री की आराधना करते हुए सुख, समृद्धि और शांति की कामना की।मंदिर प्रबंधन के अनुसार नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। मंदिर प्रबन्धक देवराज सिंह ने बताया कि नवरात्रि के दौरान प्रात: आरती सुबह 8 बजे तथा रात्रि आरती रात 10 बजे होगी। मंदिर प्रबंधन ने सभी भक्तों से अधिक से अधिक संख्या में मंदिर पहुंचकर माता रानी के दर्शन करने एवं नवरात्रि उत्सव में भाग लेने की अपील की है। मीडिया प्रभारी अभय उपाध्याय ने बताया मंदिर व्यवस्था में मुख्य रूप से देवराज सिंह मुकुंद मिश्रा राहुल सरस्वर तुषार वर्मा मेघांश पंकज जी डॉ आशीष श्रीवास्तव और अन्य सेवादार उपस्थित रहे।
सप्तशती पाठ संग गाये भजन:
इंदिरानगर निवासी रचना ने पति और बच्चों के साथ विधि विधान से कलश स्थापना की और मां का आह्वान किया। प्रथम शैलपुत्री के मंत्र का भी जाप किया। अलीगंज के अभय ने भी परिवार के साथ मां की वंदना की। गोमतीनगर के राजीव पत्नी के साथ न केवल कलश स्थापना की बल्कि मां की आरती भी उतारी। सप्तशती के पाठ के साथ पूजा समाप्त की। चौक के विवेक ने फूलों से मां का दरबार सजाया और फिर मां की पूजा की। परिवार के साथ समाज की कुशलता की कामना भी की। मां के भजन भी गाए। पूजा ने पूजन के साथ नारियल-बर्फी का भोग लगाया। बच्चों को भी सुबह की पूजा में बैठाया और शक्ति की आराधना के बारे में जानकारी दी। तेलीबाग विनोद ने कलश स्थापना के साथ पाठ किया और ज्योति की स्थापना की।
51 शक्ति पीठ में मां का नीलांबर शृंगार:
नंदन बक्शी का तालाब स्थित 51 शक्तिपीठ धाम में भारतीय नव संवत की प्रथम बेला की वासंतिक नवरात्र के प्रथम दिवस पर मां शैलपुत्री का पिंडी पूजन आचार्य धनंजय पांडे द्वारा संपन्न हुआ। मंदिर में प्रथम दिन शैलपुत्री मां का निलाम्बर श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर को नीले रंग से सजाया गया। मंदिर में सेवादार सभी नीले रंग मे थे। मंदिर की अध्यक्ष तृप्ति तिवारी ने बताया कि नवरात्र के प्रतिदिन मां का अलग-अलग स्वरूपों में रंगों में पूजा अर्चना की जाएगी शाम को भजन कीर्तन के आयोजन किए गए।
कहीं मेवे से तो कहीं फूलों से हुआ मां का शृंगार:
शास्त्रीनगर के दुर्गा मन्दिर में मेवे से शृंगार किया गया। शाम को महिलाओं ने कीर्तन किया। मन्दिर के बाहर लगे मेले का बच्चों और महिलाओं ने आनन्द लिया। ठाकुरगंज के मां पूर्वी देवी मन्दिर बाघम्बरी सिद्धिपीठ में नवरात्र पर्व कलश स्थापना के संग शुरू हुआ। सुबह में दुर्गा सप्तसती के मंत्र से मां की पूजा की गई तो वहीं शाम को भजनों की रसधार प्रस्तुति ने भक्तों को भक्ति के रंग में रंग दिया।
यहां भी भक्तों ने किये मां के दर्शन:
संकटा देवी मंदिर, हुसैनगंज के भुइयन देवी मन्दिर, राजाजीपुरम के माता शीतला देवी मन्दिर, गोमतीनगर के कामाख्या देवी मन्दिर, योगीनगर त्रिवेणीनगर के दुर्गा मन्दिर, सीतापुर रोड के विंध्यांचल देवी मन्दिर, टिकैतरा तालाब के शीतला देवी मन्दिर, बीकेटी के माता चन्द्रिका देवी मन्दिर सहित अन्य मन्दिरों में कोरोना गाइडलाइन के तहत बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने पहुंचे।
कलश स्थापना के साथ लगे मां के जयकारे
लखनऊ। वैदिक मंत्रोच्चारण से गुंजायमान वातावरण, कलश पर आम के पल्लव के ऊपर जलती मां की ज्योति और सप्तशती का पाठ। कुछ ऐसा ही माहौल शहर के घरों में नजर आया।
सूर्योदय से लेकर दोपहर बाद तक कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त होने के बावजूद श्रद्धालुओं ने सुबह कलश स्थापना कर पूजन शुरू कर दिया। मां के जयकारे के बीच परिवार के साथ सभी ने विधि विधान से मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का आह्वान किया। लकड़ी की चौकी पर कलश स्थापना के साथ ही मां की ज्योति जलाई गई। पुष्प और और मिष्ठान के साथ मां की पूजा-अर्चना की गई। लालरंग की चुनरी से जगमगाता मां का दरबार देखते ही बन रहा है। कोई मां की आरती गा रहा है तो कोई मां को भजनों का गुलदस्ता पेश कर रहा है। मां के आह्वान के साथ ही श्रद्धालुओं का उपवास भी शुरू हो गया हर दिन मां के स्वरूपों की पूजा की जाएगी। मां दुर्गा के मंदिरों में पुजारियों की ओर से मां की ज्योति की स्थापना की गई। संदोहन देवी मंदिर के अध्यक्ष केके मेहरोत्रा ने बताया कि सुबह ज्योति जलाकर पुजारियों ने मां का आह्वान किया। शास्त्रीनगर दुर्गा मंदिर के प्रबंधक राजेंद्र गोयल ने बताया कि ज्योति जलाकर कामना की गई।
आज होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना
लखनऊ। नवरात्र पर्व के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा.अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को मां के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। यह जानकारी भविष्य पुराण से ली गई हे । इस दिन साधक कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए भी साधना करते हैं। जिससे उनका जीवन सफल हो सके और अपने सामने आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का सामना आसानी से कर सकें। माँ दुगार्जी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन इन्हीं के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र में शिथिल होता है। इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है।





