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चैती महोत्सव के मंच पर कृष्णलीला संग बही भक्ति की सरिता

चैती महोत्सव ऐशबाग रामलीला मैदान

लखनऊ । मंगलवार को ऐशबाग रामलीला मैदान में चल रहे चैती महोत्सव के सांस्कृतिक मंच की शुरूआत भक्ति बीटस भजन जैमिन विथ प्रतीक शर्मा द्वारा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान श्रीगणेश की अत्यंत लोकप्रिय और स्तुतिपूर्ण पद वंदना गाइये गणपति जग बंदन से आरंभ हुई जिसके बाद संगीतमय हनुमान चालीसा और बृज के भजनों को फ्यूजन गिटार और बीट बॉक्स के संगीत के साथ प्रस्तुत किया गया । प्रतीक शर्मा की आवाज में भजनों को आर्यन द्वारा फ्यूजन गिटार और दिनेश्वर द्वारा बीट बॉक्स के संगीत से सजाया गया ।
इसके उपरांत सूरदास जी द्वारा रचित भ्रमर गीत काव्य से उद्धव जो श्री कृष्ण के सलाहकार और चचेरे भाई थे और गोपिकाओ के बीच हुए ब्रह्म ज्ञान और प्रेम ज्ञान पर हुयी चर्चा पर आधारित नृत्य नाटिका का प्रस्तुतिकरण किया गया, जिसका निर्देशन एवं परिकल्पना नृत्य गुरु सय्यद शमशुर रहमान (नवेद) द्वारा किया गया, तबले से पंडित विकास मिश्रा जी, बांसुरी से अल्का ठाकुर व सरोद से श्री ह्रदय ने संगीत को सजाया, कथन तृप्ति भारद्वाज के साथ प्रखर पांडेय के सुर से सुसज्जित इस संगीतमय नृत्य नाटिका को सय्यद शमशुर रहमान नवेद,अनुष्का प्रकाश, आर्यका श्रीवास्तव, पंकज पांडेय, अभिलाषा सिंह, अनुष्का श्रीवास्तव, आकृति भारद्वाज, शैली मौर्या, दिया चंद्रा ने अपने नृत्य कला के कौशल से सजाया ।
गणेश वंदना बाल कलाकार श्री, स्वस्तिका, मायशा, आराध्या, अनन्या, मिश्का, मेहर, प्रिशिता, सताक्षी, काव्या, दृष्टि, तृश्या, अनाएशा, श्रेयान, आर्वित, सृष्टि, समृद्धा, शानवी एवं वेदिका ने प्रस्तुत की । इसके उपरांत चैती महोत्सव के मुख्य आकर्षण कृष्णलीला का मंचन आरंभ हुआ जिसे भास्कर नृत्य कला केंद्र कोलकाता के कालकारों द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है । कृष्णलीला में कंस वध के उपरांत देवकी और वसुदेव को कंस के कारागार से मुक्त कराने के बाद विस्थापित राजा उग्रसेन का पुन: राज्याभिषेक किया जाता है, इसके बाद नंद बाबा की मथुरा से विदाई के करुणा से भरे दृश्यों को देख कुछ श्रोताओं की आंखें छलक उठीं । इसके उपरांत श्रीकृष्ण और बलराम को शिक्षा ग्रहण करने हेतु संदीपन ऋषि के आश्रम भेजा जाता है जहाँ कन्हैया अपने भाई बलराम और मित्र सुदामा के साथ गुरु संदीपन से मात्र 64 दिनों में चौसठ कलाओं, चौदह विद्याओं, चार वेदों और अठारह पुराणों का ज्ञान प्राप्त किया ।
इसके बाद मगध के अत्याचारी राजा जरासंध जो बेहद शक्तिशाली और क्रूर था तथा जिसने 86 राजाओं को बंदी बना रखा था और 100 राजाओं की बलि देकर चक्रवर्ती सम्राट बनना चाहता था, इसी कड़ी में वह श्रीकृष्ण से भी युद्ध लड़ने जाता है जहाँ कृष्ण उसे अपमानित कर देते हैं ।
उधर भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र व चचेरे भाई उद्धव जो श्रीकृष्ण के निर्गुण ब्रह्म रूप के उपासक भी थे। पर उन्हे अपने भक्ति ज्ञान घमंड भी था, ऐसे मे कृष्ण ने उद्धव के ज्ञान के अहंकार को दूर करने के लिए उन्हें गोपियों के पास वृंदावन भेज दिया, जहाँ उद्धव का गोपियों के साथ शास्त्रार्थ होता है, गांव की गोपियों के निस्वार्थ प्रेम के आगे नतमस्तक होकर उद्धव ज्ञान पर भक्ति की सर्वोच्चता को स्वीकार करते हैं । और इसी के साथ छठे दिन की लीला का समापन हो जाता है । ऐशबाग रामलीला समिति के अध्यक्ष हरीशचंद्र अग्रवाल ने बताया की बुधवार को कृष्णलीला में श्रीकृष्ण द्वारा द्वारिका नगरी का निर्माण, जरासंध का मथुरा का राजा बनना, श्रीकृष्ण का राज्याभिषेक, श्रीकृष्ण दूत का संधि पत्र लेकर हस्तिनापुर जाना व रुकमिणी विवाह की लीलाओं का मंचन किया जाएगा ।

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