लखनऊ। रमजान-उल-मुबारक का चांद होने का एलान होते ही बुधवार शाम को शहर का मिजाज भी बदल गया। इबादत के लिए मस्जिदें गुलजार हो गईं। राजधानी में मुसलमानों ने मस्जिदों और इबादतगाहों में तरावीह की नमाज जमात के साथ अदा की। एक-दूसरे को चांद दिखने की मुबारकबाद दी। पहला रोजा गुरुवार को रखा जाएगा। कमेटी के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि रमजान का चांद हो गया है।
देश में आज यानी बुधवार को रमजान का चांद दिख गया है। जिसके चलते रमजान का पवित्र महीना कल से शुरू होगा। इससे पहले 17 फरवरी को सऊदी अरब में चांद दिखाई दिख चुका है, जिसके बाद वहां 18 फरवरी से रमजान के रोजे शुरू हो गए। आमतौर पर भारत में इसके एक अगले दिन से ही रोजा शुरू किया जाता है।
माह-ए-रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना होता है और इसे सबसे पवित्र समयों में गिना जाता है। इस महीने की खासियत यह है कि इसी दौरान पवित्र कुरआन शरीफ का अवतरण शुरू हुआ था। रमजान केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, संयम, इबादत और इंसानियत को मजबूत करने का अवसर भी है।
पहला रोजा गुरुवार को रखा जाएगा। वहीं शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी और इदारा शरिया हिलाल कमेटी के अध्यक्ष मौलाना अबुल इरफान मियां फरंगी महली ने भी रमजान के चांद होने का एलान किया। रमजान का महीना सभी मुसलमानों के लिए बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है। रमजान को रमदान भी कहते हैं। रमजान इस्लामी कैलेण्डर का नवां महीना है। रमजान के महीने में लोग रोजे व्रत रखने, रात में तरावीह की नमाज पढ़ना और कुरान तिलावत करना शामिल है। मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे महीने रोजा रखते हैं और सूरज निकलने से लेकर डूबने तक कुछ नहीं खाते पीते हैं। इसके साथ में महीने भर इबादत करते हैं।
रमजान का महीना सभी मुसलमानों के लिए बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है। रमजान को रमदान भी कहते हैं। रमजान इस्लामी कैलेण्डर का नवां महीना है। रमजान के महीने में लोग रोजे व्रत रखने, रात में तरावीह की नमाज पढ़ना और कुरान तिलावत करना शामिल है। मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे महीने रोजा रखते हैं और सूरज निकलने से लेकर डूबने तक कुछ नहीं खाते पीते हैं। इसके साथ में महीने भर इबादत करते हैं।
फिजा में गूंजती रही कुरान की तिलावत:
रमजान का चांद दिखने के बाद अलग-अलग मस्जिदों में तरावीह की विशेष नमाज के लिए भीड़ जुटनी शुरू हो गई। ऐशबाग ईदगाह, नदवा, शाहमीना शाह दरगाह, चौक सब्जी मंडी, डालीगंज अमीर खां मस्जिद, इरादत नगर मदार बख्श मस्जिद, लाहौरगंज, माल एवेन्यू स्थित दादा मियां दरगाह, कासिम शहीद बाबा दरगाह, बड़ा चांदगंज, खदरा, निशातगंज, हुसैनाबाद, अमीनाबाद, मौलवीगंज, नक्खास सहित पूरे शहर की मस्जिदों में देर रात तक तरावीह की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई।
रात बन जाती है दिन:
नजीराबाद में रहने वाले 68 साल के बुजुर्गवार मोहसिन बताते हैं, रमजान का चांद दिखने के बाद से ही दुकानें यहां सजने लगती हैं। जो दुकानें 10-11 बजे बंद हो जाती थीं, वह पूरी रात खुली रहती हैं क्योंकि सामान लेने वाले लोग आते रहते हैं। मोहसिन कहते हैं, जब उन्हें पहला रोजा रखना था, तो पूरी रात वह अपने पिता के साथ लखनऊ की बाजारों में घूमते रहे। रोजा रखने की तो खुशी थी ही, लेकिन अब्बा के साथ सहरी का सामान घरवालों के लिए खरीदने का मजा ही अलग था। रात भर का नजारा ऐसा लगता, मानों यह रात नहीं, दिन हो। दिन जैसी चहल-पहल, वैसी ही रौनक। मोहसिन बताते हैं कि रात में सारी खरीदारी करने के बाद फज्र की नमाज होने के वक्त घर पहुंचे और पहला रोजा रखा था। मोहसिन के नौजवानी के वक्त की बाजार की रौनक आज भी कायम है। नजीराबाद में लखनऊ आर्ट की दुकान के सामने तकरीबन 70-80 साल से एक दुकान लग रही है। सेवईं से लेकर, लस्सी और तमाम चीजें यहां बिकती हैं। खरीदने वालों की संख्या भी अनगिनत है। इसी दुकान के पास तकरीबन 100 साल पुरानी लस्सी की दुकान है। यहां भी कुछ ऐसी ही हाल है। जुटान देखकर ऐसा लगता है मानों न किसी की आंखों में नींद है और न ही किसी भी तरह की थकान। रात भर यहां दोस्तों के साथ हो-हल्ला करते नौजवान दिखते हैं।
इधर चांद दिखा, उधर बाजार में उमड़ी रोजेदारों की भीड़
लखनऊ। रमजान का चांद दिखाई देने का ऐलान होते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। मौलवीगंज से यहियागंज की तरफ बढ़ने वाले रास्ते पर लोगों का हुजूम देखते ही बनता है। दिन की ही तरह दौड़ रहे टेंपो लोगों को नक्खास बाजार तक पहुंचाते हैं। नक्खास में सेवईं की दुकानें पहले ही दिन सज गई हैं। सूखी सेवइयां मिल रही हैं तो बगल में ठेले पर मेवा वाले ब्रेड का भी अंबार लगा है। रस और दूसरी चीजें, जिन्हें दूध के साथ सहरी में खाया जाता है, यहां के ठेलों पर बिकना आम है। चाय के शौकीनों के लिए चाय की पत्ती की भी दुकान है तो कश्मीरी चाय का भी आॅप्शन यहां मौजूद रहता है। नक्खास की बाजार में जमा लोगों में से एक राशिद आलम बताते हैं, चांद रात के दिन से ही लखनऊ में जो रौनक लगती है, वह कही और नहीं होती। जैसे-जैसे वक्त बढ़ता जाएगा, यह रौनक भी बढ़ती जाएगी। बाजार में धीरे-धीरे और आइटम मिलने लगेंगे।
बाजारों में बढ़ी चहल-पहल:
बाजारों में भी रमजान की रौनक रविवार से ही छा गई। किसी ने रोजा इफ्तार तो किसी ने सहरी की तैयारी के सामान की खरीदारी की। दुकानदारों ने भी रोजेदारों के लिए विशेष सुविधाएं की हैं। इफ्तार में लोग पापड़, चिप्स और काबुली चने जैसीं चीजे ज्यादा पसंद करते हैं। इसे देखते हुए बाजार भी कई वैराइटी के चिप्स से सज गए।
पुराने लखनऊ के बाजारों में खूब हो रही खरीदारी:
रमजान को लेकर पुराने लखनऊ शहर के अकबरी गेट, विक्टोरिया स्ट्रीट, कश्मीरी मोहल्ला, नक्खास, मौलवीगंज, वजीरगंज, गोलागंज जैसे इलाकों में देर शाम तक बाजार गुलजार हो रहे हैं। खासकर अकबरी गेट पर लोग काफी दूर-दूर से रात में आकर कुल्चे-नहारी, बिरयानी, कश्मीरी चाय का मजा लेने पहुंच रहे हैं। रमजान को देखते हुए पुराने लखनऊ के बाजारों में कारीगरों ने सेवई के लच्छे तैयार करना शुरू कर दिए हैं। रोजेदार सहरी में दूध-लच्छे खाना अधिक पसंद करते हैं। पुराने शहर के खदरा, हुसैनाबाद, अकबरी गेट, नक्खास, मौलवीगंज, काजमैन और कश्मीरी मोहल्ला आदि इलाके के बाजारों में लच्छे की दुकानें सज गई हैं।
सेवई के लच्छे की मांग सबसे ज्यादा:
रमजान को देखते हुए पुराने लखनऊ के मार्केट में कारीगरों द्वारा सेवई के लच्छे तैयार करना शुरू कर दिए हैं, क्योंकि रोजेदार सहरी में दूध-लच्छे खाना अधिक पसंद करते है। पुराने शहर के खदरा, हुसैनाबाद, अकबरी गेट, नक्खास, मौलवीगंज, काजमैन और कश्मीरी मोहल्ला आदि इलाके के बाजारों में लच्छे की दुकानें सज गई है। यह दुकानदार 160 से 200 रुपये किलो लच्छे बेच रहे हैं।
खजूरों की बढ़ गई डिमांड :
रमजान में खजूर की बड़ी अहमियत होती है। हर रोजेदार चाहता है कि वह बेहतर खजूर से अपना इफ्तार करे और दूसरों को भी कराए। ऐसे खजूर की मांग है, जो स्वादिष्ट व पौष्टिक हो। रोजेदारों की पसंद को देखते हुए खजूरों की एक से बढ़कर एक वैराइटी मार्केट में आ गई है। खाड़ी देशों समेत इराक व इरान आदि से आने वाले खजूरों की मांग सबसे ज्यादा है। इसमें अजवा खजूर की मांग रोजेदारों में सबसे ज्यादा है।
मस्जिदों में रमजान की विशेष नमाज तरावीह के इंतजाम पूरे
लखनऊ। रमजान को देखते हुए सभी मस्जिदों में रमजान की विशेष नमाज तरावीह के इंतजाम भी पूरे कर लिए गए हैं। इस्लामिक सेंटर आॅफ इंडिया ने रमजान के लिए गाइडलाइन भी जारी कर दी है। चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने गाइडलाइन का पालन करने की अपील की है। गाइडलाइन के अन्तर्गत मौलाना ने कहा कि सहरी करना सुन्नत है लेकिन सहरी के वक्त का बार-बार ऐलान न किया जाए और न ही किसी प्रकार का शोर किया जाए। जिससे पड़ोसियों और मोहल्ले वालों को कोई तकलीफ न हो। मस्जिदों के पास और मोहल्लों में सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। अधिक से अधिक जरूरतमंदों की मदद की जाए, जिन लोगों पर जकात फर्ज है वह अपने माल का ढाई प्रतिशत निकालकर हकदार को दें।
इन मस्जिदों में पांच, तीन और सवा पारे की तरावीह
जामा मस्जिद ईदगाह पांच पारे, समय रात 7:45 बजे, मस्जिद नदवा सवा पारा, 8.30 बजे, मस्जिद दरगाह शाहमीना शाह, पांच पारे, 7:45 बजे, मस्जिद उमर, तीन पारे, 8 बजे, मस्जिद इब्राहीमी बिल्लौचपुरा, डेढ़ पारे, 8 बजे, मस्जिद कच्चा हाता अमीनाबाद, डेढ़ पारे, 8 बजे, शाही मस्जिद भवानी गंज, दो पारे 7:45 बजे, मस्जिद फिरदौस हैदरगंज, दो पारे, 7:45 बजे, मस्जिद नूर पुरानी सब्जी मण्डी चौक, तीन पारे, 7:45ब बजे, मस्जिद तकिया वाली बिल्लौचपुरा, तीन पारे, 7:45 बजे रमजान हेल्पलाइन इस्लामिक सेंटर आॅफ इंडिया में रमजान हेल्पलाइन पहली रमजान से शुरू होगी। नाजिम दारुल उलूम फरंगी महल मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि रोजा और अन्य इबादत के सही होने के मसायल जानना जरूरी है। इसके बिना खुदा की इबादत का हक नहीं अदा किया जा सकता। मौलाना ने कहा कि इस्लामिक सेंटर में हेल्पलाइन पर कॉल पर रोजे, नमाज, जकात, सहरी, अफ्तार आदि से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं। हेल्पलाइन के नम्बर 9415023970, 9335929670, 9415102947, 7007705774, 9140427677 पर दोपहर दो से चार बजे तक सवाल पूछे जा सकते हैं, जिनके जवाब उलेमाओं का पैनल देगा।





