लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के विशेष अवसर पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), स्थानीय प्रधान कार्यालय, लखनऊ में राजभाषा कार्यान्वयन समिति (राकास) की तिमाही बैठक का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल के मुख्य महाप्रबंधक दीपक कुमार दे ने की, जहाँ उन्होंने बैंक के विभिन्न विभागों में हिन्दी के प्रयोग की समीक्षा की और राजभाषा के महत्व पर प्रकाश डाला।
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य महाप्रबंधक दीपक कुमार दे ने भावुक और प्रेरक विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “मातृभाषा व्यक्ति के मन का विश्वास होती है। यह हमारे जीवन की प्रथम पहचान है और संसार को समझने का हमारा पहला माध्यम भी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि मातृभाषा ही हमारे विचारों को आकार देती है और हमें अपनी संस्कृति से मजबूती से जोड़े रखती है।
श्री दे ने राजभाषा हिन्दी को केवल संवैधानिक दायित्व तक सीमित न मानकर इसे बैंकिंग व्यवसाय के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि हिन्दी ग्राहकों के साथ ‘विश्वास का सेतु‘ है। जब ग्राहक को उसकी अपनी भाषा में सेवा मिलती है, तो उसका बैंक के प्रति संतोष और भरोसा, दोनों बढ़ जाते हैं।
बैठक के दौरान मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संपन्न हुईं। बैठक में श्री अनिल कुमार (नेटवर्क-1),राजीव कुमार (नेटवर्क-2) और कौशलेन्द्र कुमार (नेटवर्क-3) ने भी अपनी सहभागिता दर्ज की। मुख्य महाप्रबंधक ने मंडल स्तरीय चित्रांकन एवं कैलिग्राफी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। तिमाही के दौरान हिन्दी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागों को ‘राजभाषा शील्ड’ प्रदान की गई। श्री दे ने बैंक की पत्रिका ‘वातायन’ के नवीन अंक का विमोचन किया और राजभाषा विभाग की सराहना करते हुए कहा कि यह पत्रिका स्टाफ सदस्यों की रचनात्मकता को एक बेहतरीन मंच प्रदान कर रही है।कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक महाप्रबन्धक (राजभाषा), दिवाकर मणि ने किया, जबकि अंत में मंडल विकास अधिकारी धीरेंद्र महे ने प्रबंधन समिति की ओर से सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।





