लखनऊ। लखनऊ में इस वर्ष पुन: एक रोचक आयोजन ने धूम मचाई, घोंघाबसंत सम्मेलन विश्व का सबसे पुराना एवं अनूठा हास्य-आयोजन है, जो अखिल भारतीय सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं समाजसेवी संस्था रंगभारती द्वारा प्रतिवर्ष एक अप्रैल को रवीन्द्रालय, लखनऊ में हास्य-उत्सव के रूप में सम्पन्न होता है। इस वर्ष भी आज घोंघाबसन्त सम्मेलन पूरे उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। हंसी के धमाकों में लोगों ने हास्य-उत्सव का जमकर आनन्द लिया। उलटी गंगा बहाते हुए समारोह के अंत में घोंघाबसंत सम्मेलन का उद्घाटन मूर्खिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में गधे ने किया।
समारोह में मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक थे, जिन्होंने अपने सम्बोधन में इस बात की प्रशंसा की कि श्याम कुमार के नेतृत्व में रंगभारती ने अनेक नई-नई शुरुआतें कीं, जिनमें से एक प्रयोग घोंघाबसंत सम्मेलन है। यह श्याम कुमार जी का जीवट व्यक्तित्व है कि उन्होंने साधनों का अभाव होते हुए भी तमाम ऐसे कार्यक्रमों, परंपराओं आदि की नींव डाली, जो आज धूम मचा रहे हैं। समाजसेवा एवं परोपकार श्याम कुमार के जीवन का मुख्य उद्देष्य रहा है तथा उन्होंने तन, मन, धन से समर्पित होकर इस उद्देष्य की पूर्ति की।
आयोजन में विशेष अतिथि के रूप में ब्रजेश पाठक की पत्नी नम्रता पाठक, महंत देव्यागिरि, सुधीर हलवासिया एवं अन्य अनेक विशिष्टजन उपस्थित थे।
उद्देश्य रंगभारती की स्थापना 1961 में हुई थी तथा उसी वर्ष रंगभारती ने घोंघाबसंत सम्मेलन के रूप में देश का पहला हास्य कविसम्मेलन इलाहाबाद(प्रयागराज) के ऐतिहासिक परी भवन में आयोजित किया था, जो बाद में रवीन्द्रालय की स्थापना होने पर लखनऊ में सम्पन्न होने लगा। देश के अन्य विभिन्न नगरों में भी रंगभारती हास्य-उत्सव के आयोजन करती आ रही है, जिसके अन्तर्गत बड़े-बड़े हास्य कविसम्मेलन सम्पन्न होते हैं। इन हास्य-उत्सवों का उद्देश्य होता है-आज की तनावभरी जिन्दगी में हंसना-हंसाना।
भाग लेने वाले रचनाकार
घोंघाबसन्त सम्मेलन में इन सुविख्यात हास्य-व्यंग्य कवियों ने अपनी रचनाओं से खूब मनोरंजन किया सूर्यकुमार पांडेय (लखनऊ), डंडा (वाराणसी), समीर शुक्ल (फतेहपुर), नरकंकाल (रायबरेली), बिहारी लाल अंबर(प्रयागराज), अमित अनपढ़ (लखनऊ), विनोद सिंह कलहंस (बलरामपुर), डॉ. ताराचंद तनहा (अयोध्या), कमलेष मौर्य मृदु (सीतापुर), राज बनारसी (वाराणसी), अरविंद झा (लखनऊ), श्याम कुमार (लखनऊ) आदि। घोंघाबसंत सम्मेलन के प्रथम चरण का शुभारंभ करते हुए वरिष्ठ कलाकार पद्मा गिडवानी ने दीप-प्रज्ज्वलन के साथ सरस्वती-वंदना प्रस्तुत की, जिसके बाद मशहूर हास्य कलाकार राजेंद्र विश्वकर्मा हरिहर ने चुटकुलेबाज देवकीनंदन के साथ हास्य-फुलझड़ियां पेश कीं।
रंगभारती के अध्यक्ष श्याम कुमार इस बार दूल्हे की वेषभूशा में अपने कमांडो एवं डुगडुगी-वादकों के साथ मंच पर आए और आगंतुकों का स्वागत करते हुए घोंघाबसंत सम्मेलन के द्वितीय चरण को आगे बढ़ाया। वरिष्ठ कलाकार राजेंद्र विश्वकर्मा हरिहर द्वारा श्याम कुमार का इटली के जूतों से बनी सुगन्धित माला पहनाकर अभिनन्दन किया गया।
बेढब बनारसी रंगभारती सम्मान
वर्ष 1961 में रंगभारती द्वारा आयोजित देश के प्रथम हास्य-कवि सम्मेलन में हास्यरस के महाकवि एवं रंगभारती के सदस्य स्वर्गीय बेढब बनारसी ने भाग लिया था। महाकवि बेढब बनारसी के नाम पर स्थापित महत्वपूर्ण बेढब बनारसी रंगभारती सम्मान इस वर्ष हास्यरस के इन दो महारथियों को दिया गया। सूर्य कुमार पांडेय(लखनऊ) एवं सांड़ बनारसी(वाराणसी)। वयोवृद्ध सांड़ बनारसी अस्वस्थता के कारण नहीं आ सके, इसलिए उनकी सम्मान-स्मृतिका वाराणसी में उनके आवास पर भेंट की जाएगी।
रमई काका रंगभारती सम्मान
रमई काका अवधी बोली के महान कवि थे और रंगभारती के सदस्य थे। उनके नाम पर रंगभारती ने रमई काका रंगभारती सम्मान आरंभ किया है, जो इस वर्ष अवधी के प्रसिद्ध कवि फतेहपुर-निवासी समीर शुक्ल को दिया गया।





