—विश्व रंगमंच दिवस पर जीवन के पक्ष में उठी सशक्त आवाज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर संस्था भरत रंग, लखनऊ द्वारा गुरु नानक सभागार, श्री गुरु नानक गर्ल्स पीजी कॉलेज, चारबाग में नाटक मरने के शॉर्टकट का अत्यंत प्रभावशाली एवं विचारोत्तेजक मंचन किया गया। नाटक के लेखक डॉ. कुमार संजय एवं निर्देशन जूही कुमारी का रहा।
नाटक ने अपने अनोखे कथानक और संवेदनशील प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों के मन-मस्तिष्क को गहराई से झकझोर दिया। कहानी उन व्यक्तियों के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिन्होंने जीवन की कठिनाइयों से हारकर गलत रास्ता चुना और अब भटकती आत्माओं के रूप में अपने फैसलों पर पछता रहे हैं। मंच पर भूत पात्रों का एक प्रतीकात्मक आयोजन, जहां वे तथाकथित आसान तरीकों का उल्लेख करते हुए अपनी पीड़ा साझा करते हैं, दर्शकों को भीतर तक उद्वेलित करता है। हर पात्र की कथा केवल एक घटना नहीं, बल्कि आज के समाज की सच्चाई को उजागर करती है—कैसे छोटी-छोटी परेशानियां भी व्यक्ति को मानसिक रूप से तोड़ देती हैं। नाटक का चरम उस क्षण में सामने आता है, जब सभी पात्र एक स्वर में स्वीकारते हैं कि उनके इस निर्णय ने उन्हें मुक्ति नहीं, बल्कि अंतहीन पीड़ा दी। उनका मार्मिक संवाद—मर कर भी चैन न मिला तो किधर जाएंगे—सभागार में सन्नाटा पैदा कर देता है।
यह प्रस्तुति केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक चेतावनी और जागरूकता का सशक्त माध्यम बनकर उभरती है। नाटक यह संदेश देता है कि कोई भी कठिनाई इतनी बड़ी नहीं होती कि जीवन से हार मान ली जाए; बल्कि साहस, संवाद और सकारात्मक सोच ही वास्तविक समाधान हैं। कलाकारों ने अपने सजीव और प्रभावपूर्ण अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया। जूही कुमारी, चंद्रभाष सिंह, लावण्या बाजपेई, लता बाजपेई, प्रिया बाजपेई, कृष्ण कुमार पांडेय, मृतुंजय प्रकाश, अनूप जायसवाल, अभिषेक कुमार, मुकुल कुमार एवं आयुष प्रजापति सहित सभी कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। नाटक के अंत में दर्शकों की तालियों की गूंज इस बात का प्रमाण थी कि यह प्रस्तुति केवल देखी नहीं, बल्कि गहराई से महसूस की





