लखनऊ। रोजेदार बंदों ने गुरुवार का दिन भी अल्लाह की रजा में गुजारा। प्यास की शिद्दत के बावजूद रोजेदार अल्लाह का शुक्र अदा कर रहे हैं। खुशनसीब मुसलमान एक साथ तीन फर्ज अदा कर रहे हैं, नमाज भी पढ़ रहे हैं, रोजा भी रख रहे हैं और जो मालिक-ए-निसाब हैं वह जकात भी अदा कर रहे हैं। मस्जिदों व दरगाहों पर सामूहिक रूप से इफ्तार हो रही है। माह-ए-रमजान का पांचवा रोजा भी अल्लाह की हम्दो सना में बीता। चारों तरफ रमजान का नूर छाया हुआ है। अल्लाह के बंदे दिन में रोजा रख कर व रात में तरावीह की नमाज अदा कर अल्लाह का शुक्र अदा कर रहे है। बाजारों में चहल पहल है। शाम को मगरिब की नमाज के वक्त शहर की मस्जिदों में रोजेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। रोजेदारों ने नमाज के बाद एक-साथ रोजा खोल कर अपने रब की बारगाह में उसकी नेमतों के लिए शुक्र का सजदा अदा किया।
रमजान का महीना अल्लाह का महीना:
मुफ्ती अबुल इरफान मियां फिरंगी महली, सुन्नी धर्मगुरु ने कहा रमजान मुबारक के पहले दस दिन को रहमत का अशरा कहा जाता है। ग्यारह महीने से दुनिया में मसरूफ अल्लाह के बंदे जब रोजा रखकर अपने को तमाम बुराइयों और दुनियादारी से अलग कर सिर्फ अल्लाह की दिन रात इबादत करते हैं तो अल्लाह उनके लिए अपनी रहमतों और नेमतों के खजाने खोल देता है। ये इबादत और तिलावत सारी उम्र की कमाई से बेहतर होती है। मौलाना सैफ अब्बास, शिया धर्म गुरु ने कहा रमजान का महीना अल्लाह का महीना है। बरकत और रहमत के इस महीने में सवाब दूसरे महीनों की इबादत से ज्यादा है। अल्लाह ने रमजान का महीना बंदों की मगफिरत के लिए बनाया है। 11 महीनों में बंदा जो गलती करता है, उसकी रमजान के महीने में माफी मांग सकता है। अल्लाह माफ करने वाला है। अल्लाह की इबादत का सबसे अफजल महीना है। इसमें ज्यादा से ज्यादा इबादत और लोगों की मदद करें।
बाजारों में बढ़ी रौनक
अकीदतमंदों ने इशा की नमाज के बाद तरावीह की नमाज अदा की। तरावीह की नमाज के बाद बाजार एक बार फिर से गुलजार हो उठे। देर रात तक लोगों ने बाजारों में चहलकदमी और खरीदारी करने के साथ ही सेहरी के लिए जरूरी चीजें खरीदीं। पुराने लखनऊ के अकबरी गेट, पाटानाला, हुसैनाबाद, सआदतगंज, अमीनाबाद, नजीराबाद आदि इलाकों में दिन में सन्नाटा और शाम को रौनक बढ़ने लगी है।





